ऋषिकेश

स्वतंत्रता के 80वें वर्ष पर परमार्थ गुरुकुल में राष्ट्रभक्ति और संस्कृति का भव्य संगम

ऋषिकेश। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन के परमार्थ गुरुकुल में राष्ट्रभक्ति, भारतीय संस्कृति और राष्ट्रनिर्माण के संकल्प के साथ भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर तिरंगे को सम्मानपूर्वक फहराया गया और पूरा गुरुकुल परिसर देशभक्ति की भावना से सराबोर रहा।

गुरुकुल के ऋषिकुमारों ने वैदिक मंत्रोच्चार, राष्ट्रगान, देशभक्ति गीतों एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की गौरवशाली परंपरा, स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रनिर्माण की भावना को जीवंत किया। परमार्थ निकेतन की ओर से समस्त देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दी गईं।

परमार्थ पीठाधीश्वर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि भारत की स्वतंत्रता केवल 15 अगस्त 1947 को प्राप्त हुई राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक अस्मिता, ज्ञान-परंपरा और राष्ट्रधर्म सदियों से जीवित रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने कभी केवल भूभाग को राष्ट्र नहीं माना, बल्कि मातृभूमि, गंगा, हिमालय, ऋषि-परंपरा, संस्कृति, संस्कार और समाज की समन्वित अनुभूति को भारत माना है।

उन्होंने कहा कि भारत की स्वतंत्रता की गाथा को समझना हो तो देश के गुरुकुलों और ज्ञान-परंपरा को समझना होगा। गुरुकुल केवल शिक्षा के केंद्र नहीं थे, बल्कि चरित्र, संयम, कर्तव्य, शौर्य, सेवा, सत्य, त्याग और राष्ट्रधर्म की शिक्षा देने वाले राष्ट्रनिर्माण के केंद्र थे। आचार्य और शिष्य का संबंध जीवन निर्माण का संबंध था और गुरुकुलों ने ऐसी पीढ़ियां तैयार कीं, जिन्होंने व्यक्तिगत सुख से ऊपर समाज और राष्ट्र के हित को रखा।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि भारत की स्वतंत्रता की नींव संतों, आचार्यों, संन्यासियों, शिक्षकों, क्रांतिकारियों, किसानों, श्रमिकों, माताओं और युवाओं के त्याग से मजबूत हुई। श्रीमद्भगवद्गीता का कर्मयोग, उपनिषदों का आत्मज्ञान, रामायण का मर्यादा एवं धर्म तथा वेदों का लोककल्याणकारी चिंतन भारतीय समाज को सदियों से दिशा देता रहा है।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के 80 वर्षों में भारत ने गरीबी, अशिक्षा, विभाजन की पीड़ा, युद्ध, सामाजिक विषमताओं और विकास की कठिन चुनौतियों का सामना किया, लेकिन देश निरंतर आगे बढ़ा। विज्ञान, अंतरिक्ष, कृषि, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, चिकित्सा और खेल सहित विभिन्न क्षेत्रों में भारत ने अपनी सामर्थ्य का परिचय दिया है।

उन्होंने राष्ट्रवासियों से आह्वान किया कि स्वतंत्रता के मूल्यों को जीवन में उतारें और भय, अज्ञान, स्वार्थ तथा विभाजनकारी विचारों से मुक्त होकर एक भारत, श्रेष्ठ भारत और विश्वकल्याणकारी भारत के निर्माण में योगदान दें। परमार्थ निकेतन की ओर से देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की मंगलकामनाएं प्रेषित की गईं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *