श्रावण शिवरात्रि पर परमार्थ निकेतन में गूंजा ‘हर हर महादेव’
शिव-साधना के साथ सेवा का संदेश, बाघखाला चिकित्सा शिविर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
ऋषिकेश। श्रावण शिवरात्रि के पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन में मंगलवार को आध्यात्मिकता, भक्ति और सेवा का अनूठा संगम देखने को मिला। आश्रम परिसर में ऋषिकुमारों द्वारा रुद्राभिषेक और पूजन किया गया, वहीं परमार्थ निकेतन की ओर से बाघखाला में आयोजित चिकित्सा शिविर में बड़ी संख्या में शिवभक्तों और श्रद्धालुओं ने स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया।

परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष एवं परमार्थ पीठाधीश्वर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने शिवभक्तों को श्रावण शिवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शिवरात्रि चेतना के जागरण, अंतर्मन के शुद्धिकरण और जीवन को लोककल्याण के लिए समर्पित करने का पर्व है।
उन्होंने कहा कि शिव का अर्थ ही कल्याण है। किसी के जीवन से पीड़ा कम करना, किसी जरूरतमंद को स्वास्थ्य, सहयोग और सम्मान देना भी शिव की आराधना है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव को केवल पूजना ही नहीं, बल्कि उनके गुणों को अपने जीवन में आत्मसात करना आवश्यक है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि भगवान शिव का जीवन त्याग, तपस्या, समता, करुणा और लोकमंगल का संदेश देता है। उन्होंने विष को अपने कंठ में धारण कर संसार को अमृतमय जीवन देने का संदेश दिया। यही शिवत्व का सार है कि स्वयं कष्ट सहकर भी दूसरों के जीवन में सुख, शांति और सुरक्षा का संचार किया जाए।
श्रावण शिवरात्रि पर बाघखाला में आयोजित चिकित्सा शिविर में विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे शिवभक्तों और श्रद्धालुओं ने स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लिया। चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों ने सेवा भाव से श्रद्धालुओं को आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराईं। शिवभक्ति के लिए यात्रा कर रहे श्रद्धालुओं के लिए यह चिकित्सा सेवा महत्वपूर्ण साबित हुई।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि शिवरात्रि व्यक्ति को अपने भीतर के अंधकार को पहचानकर उसे ज्ञान, करुणा और प्रेम के प्रकाश से दूर करने की प्रेरणा देती है। यह पर्व अहंकार से समर्पण, स्वार्थ से परमार्थ और पूजा से सेवा की ओर बढ़ने का संदेश देता है।
उन्होंने शिवभक्तों से “शिवाभिषेक के साथ धराभिषेक” करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इस शिवरात्रि प्रत्येक व्यक्ति अपने भीतर करुणा, प्रेम, समर्पण और सेवा का दीप जलाए। शिव की साधना के साथ सेवा का संकल्प लेकर जीवन में शिवत्व का प्रकाश फैलाना ही सच्ची शिव आराधना है।
