दिल्ली अग्निकांड: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, केशर सिंह नेगी की रिहाई और असली दोषियों की गिरफ्तारी की मांग
नई दिल्ली। हौज रानी स्थित फ्लोरिश स्टे होटल अग्निकांड में 15 विदेशी नागरिकों सहित 23 लोगों की मौत के मामले में सैकड़ों लोगों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर निष्पक्ष जांच, वास्तविक दोषियों की गिरफ्तारी और होटल के रसोइए केशर सिंह नेगी की रिहाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने “रसोइया है अपराधी नहीं”, “असली दोषियों को गिरफ्तार करो, केशर नेगी को बाइज्जत बरी करो” और “23 लोगों की मौत का न्याय दो” जैसे नारे लगाए।

प्रदर्शन में राष्ट्रीय स्वाभिमान आन्दोलन के राष्ट्रीय सह-संयोजक एवं पूर्व एमसीडी निर्माण समिति अध्यक्ष जगदीश ममगांई, उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष धीरेन्द्र प्रताप, दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष लक्ष्मण सिंह रावत, दिल्ली भाजपा उत्तराखण्ड प्रकोष्ठ की प्रदेश उपाध्यक्ष ज्योति डंगवाल, सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार एवं विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
वक्ताओं ने मांग की कि अग्निकांड की जांच किसी स्वतंत्र और निष्पक्ष एजेंसी से कराई जाए तथा होटल संचालन, अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के लिए जिम्मेदार सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि मामले में वास्तविक जिम्मेदारों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है जबकि होटल के रसोइए केशर सिंह नेगी को आरोपी बनाया गया है।
जगदीश ममगांई ने दिल्ली पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि आग लगने के बाद बिजली का मुख्य स्विच बंद करना आपदा प्रबंधन और अग्निशमन की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार संबंधित विभागों और अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
प्रदर्शन का नेतृत्व उत्तराखण्ड लोकमंच के अध्यक्ष बृज मोहन उप्रेती ने किया। इस दौरान स्वतंत्र पत्रकार एवं लेखक चारु तिवारी ने संघर्ष गीत प्रस्तुत किया। प्रदर्शनकारियों ने अग्निकांड में जान गंवाने वाले 23 लोगों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।
उत्तराखण्ड क्रांति दल महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष संतोष भंडारी और पत्रकार आशुतोष नेगी सहित उत्तराखण्ड से पहुंचे प्रतिनिधियों ने भी केशर सिंह नेगी के समर्थन में अपनी बात रखी।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई न केवल पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए आवश्यक है, बल्कि देश की न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण है।
