पुल्यासू के जंगलों में तीन दिन से धधक रही आग, वन संपदा को भारी नुकसान
ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति नाराजगी, चीड़ के बढ़ते जंगलों को बताया पर्यावरण के लिए खतरा
द्वारीखाल। लैंसडॉन वन प्रभाग के अंतर्गत चैलूसैंण रेंज के ग्राम पुल्यासू स्थित राण्यूंगाड़ एवं अन्दरोलू तोक के जंगलों में पिछले दो से तीन दिनों से लगातार आग धधक रही है। जंगलों में लगी आग के कारण पारंपरिक वनस्पतियों, छोटे पेड़-पौधों तथा वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचा है। आग की घटनाओं से ग्रामीणों में चिंता और आक्रोश का माहौल बना हुआ है।

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग आग पर नियंत्रण पाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है और विभागीय स्तर पर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार जंगल जलने के बावजूद मौके पर पर्याप्त कार्रवाई नजर नहीं आ रही है।
ग्रामीणों ने कहा कि पहाड़ों में चीड़ के पेड़ों की लगातार बढ़ती संख्या पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। उनका मानना है कि चीड़ की पत्तियां और सूखी लिस्सी गर्मियों में तेजी से आग फैलाने का मुख्य कारण बनती हैं। वहीं आग की घटनाओं के चलते बांज जैसे पारंपरिक और जल संरक्षण में महत्वपूर्ण पेड़ों की संख्या लगातार कम होती जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार बांज के जंगल पहाड़ों के “कल्पवृक्ष” माने जाते हैं, क्योंकि ये जल स्रोतों को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लेकिन लगातार आग लगने से बांज के पेड़ों और अन्य उपयोगी वनस्पतियों को भारी नुकसान पहुंच रहा है, जिसका असर क्षेत्र के प्राकृतिक जल स्रोतों पर भी दिखाई देने लगा है। कई जल स्रोत सूखने की कगार पर पहुंच चुके हैं।
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि यदि सरकार चीड़ के पेड़ों के सीमित कटान और चिरान की अनुमति दे तो इससे न केवल अन्य वनस्पतियों को बढ़ने का अवसर मिलेगा, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार भी प्राप्त होगा। ग्रामीणों ने कहा कि वन आधारित रोजगार मिलने पर लोग जंगलों के संरक्षण में भी सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
उन्होंने सुझाव दिया कि चीड़ प्रबंधन नीति के तहत राजस्व मजदूरों और स्थानीय काश्तकारों को भी जोड़ा जाए, ताकि जंगलों की सुरक्षा के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सके।
ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि जंगलों में लगी आग पर तत्काल नियंत्रण किया जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्थायी कार्ययोजना तैयार की जाए।
