पौड़ी

कथा में श्रीराम लीला के माध्यम से दी गृहस्थ और संन्यास की शिक्षा

स्व. जगमोहन सिंह नेगी की स्मृति में आयोजित हो रही भागवत कथा

द्वारीखाल। विकासखंड द्वारीखाल के ग्राम पुल्यासू में स्वर्गीय जगमोहन सिंह नेगी एवं समस्त पितरों के उद्धार हेतु उनके परिजनों द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। कथा का आयोजन 15 मई से प्रारंभ हुआ है, जिसका समापन 21 मई को यज्ञ की पूर्णाहुति के साथ होगा।

कथा में व्यासपीठ से हो रहे प्रवचनों को सुनकर श्रद्धालु भक्तिभाव में सराबोर हो रहे हैं। रविवार को कथा के दौरान अनेक धार्मिक प्रसंगों का वर्णन किया गया, जिसमें शिव-पार्वती विवाह प्रसंग ने श्रद्धालुओं को विशेष रूप से भावविभोर कर दिया।

कथा वाचक व्यास जी ने भगवान श्रीराम के चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम ने अपनी लीलाओं के माध्यम से संन्यासियों और गृहस्थों दोनों को अलग-अलग शिक्षाएं प्रदान कीं।

उन्होंने प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जब भगवान श्रीराम वनवास के लिए जा रहे थे, तब ऋषियों के मन में विचार आया कि जिस प्रकार प्रभु के चरण स्पर्श से पत्थर अहिल्या के रूप में परिवर्तित हो गया, उसी प्रकार यदि उनके आश्रम के पत्थरों पर भी भगवान के चरण पड़ जाएं तो उन्हें भी पत्नी प्राप्त हो सकती है।

व्यास जी ने बताया कि अंतर्यामी भगवान श्रीराम ऋषियों के मन की बात समझ गए और उनसे कहा कि कुछ समय बाद वह पुनः इसी मार्ग से गुजरेंगे। बाद में माता सीता के हरण के पश्चात जब भगवान श्रीराम उसी मार्ग से अत्यंत दुखी अवस्था में गुजरे, तब ऋषियों को ज्ञात हुआ कि पत्नी वियोग का दुख कितना गहरा होता है। इसके बाद उन्होंने पत्थरों को फेंक दिया।

व्यास जी ने कहा कि इस लीला के माध्यम से भगवान श्रीराम ने गृहस्थों को शिक्षा दी कि पति-पत्नी के बीच गहरा प्रेम होना चाहिए, जबकि संन्यासियों को यह संदेश दिया कि पत्नी सांसारिक मोह तपस्या में बाधक बन सकती है।

कथा में विद्वान ब्राह्मण मंडली के अलावा सतेसिंह नेगी, यशवंत सिंह नेगी, भूपेंद्र सिंह नेगी, नरेश सिंह नेगी, भूपेन्द्र सिंह नेगी, राजबीर सिंह नेगी, योगंबर सिंह नेगी आदि क्षेत्र के अनेक श्रद्धालु, रिश्तेदार एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।

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