आज से शुरू हुआ पुरुषोत्तम मास, पूजा-पाठ और दान-पुण्य का विशेष महत्व
देहरादून। अधिकमास अर्थात पुरुषोत्तम मास की शुरुआत रविवार से हो गई है। यह पवित्र मास 15 जून तक रहेगा। इस दौरान भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना, कथा, साधना, मंत्र जाप और दान-पुण्य का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पुरुषोत्तम मास में किए गए पुण्य कार्यों का कई गुना फल प्राप्त होता है।

उत्तराखंड विद्वत सभा के अध्यक्ष हर्षपति गोड़ियाल के अनुसार चंद्र वर्ष 354 दिनों और सौर वर्ष 365 दिनों का होता है। दोनों के बीच लगभग 11 दिनों के अंतर को संतुलित करने के लिए हर तीन वर्ष बाद एक अतिरिक्त मास जोड़ा जाता है, जिसे अधिकमास कहा जाता है। सूर्य संक्रांति न होने के कारण इसे मलमास भी कहा जाता है, जबकि भगवान विष्णु को समर्पित होने के कारण इसका नाम पुरुषोत्तम मास पड़ा।
आचार्य सुशांत राज ने बताया कि इस महीने भगवान विष्णु की पूजा, श्रीमद्भागवत गीता पाठ, मंत्र जाप और दान-पुण्य करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। विशेष रूप से अन्न, जल, तिल, वस्त्र एवं धन का दान शुभ बताया गया है।
उन्होंने कहा कि पुरुषोत्तम मास में विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते, लेकिन आध्यात्मिक साधना और सात्विक जीवनशैली अपनाने का विशेष महत्व रहता है। उपवास को केवल धार्मिक आस्था नहीं बल्कि शरीर और आत्मा की शुद्धि का माध्यम भी माना गया है।
