सरकारी सिस्टम की बेरुखी! हादसे में जान गंवाने वाले राहुल के परिजनों को अब तक नहीं मिली राहत राशि
सड़क हादसे के बाद आर्थिक संकट में डूबा लड़ियासू गांव का परिवार
अन्य मृतकों को मिली सहायता, लेकिन राहुल के परिवार को अब तक नहीं मिला मुआवजा
रुद्रप्रयाग। टिहरी जनपद के कोटी-चंबा मोटरमार्ग पर 23 अप्रैल को हुए दर्दनाक सड़क हादसे में जान गंवाने वाले रुद्रप्रयाग जनपद के लड़ियासू गांव निवासी राहुल के परिजनों को अब तक किसी प्रकार की सरकारी सहायता नहीं मिलने का मामला सामने आया है। जबकि इसी हादसे में मृत अन्य लोगों के परिवारों को मुख्यमंत्री राहत कोष से आर्थिक सहायता वितरित की जा चुकी है। मामले को लेकर क्षेत्र में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

पीड़ित परिवार से मिलने गांव पहुंचे पूर्व विधानसभा प्रत्याशी एवं युवा नेता मोहित डिमरी ने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राहुल अपने परिवार का इकलौता कमाऊ सदस्य था और होटल में नौकरी कर वृद्ध माता-पिता, पत्नी, छह माह के मासूम बच्चे तथा छोटे भाई-बहनों का पालन-पोषण कर रहा था। राहुल की असमय मौत के बाद परिवार गहरे आर्थिक संकट में आ गया है।
उन्होंने बताया कि राहुल के माता-पिता दोनों हृदय रोग से पीड़ित हैं और नियमित दवाइयों पर निर्भर हैं। ऐसे में परिवार के सामने रोजमर्रा के खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है। गांव वालों के अनुसार घर में अब कोई स्थायी आय का स्रोत नहीं बचा है।
एक ही हादसे में अलग-अलग राहत पर उठे सवाल
मोहित डिमरी ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा घोषित दो-दो लाख रुपये की सहायता राशि भी अब तक परिवार को नहीं मिली है। वहीं टिहरी जनपद के मृतकों के परिजनों को मुख्यमंत्री राहत कोष से तीन-तीन लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ही हादसे में मृत लोगों के लिए अलग-अलग मापदंड अपनाना प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है।
जिलाधिकारी से मिलकर उठाएंगे मामला
उन्होंने कहा कि वह जल्द ही जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग से मुलाकात कर पीड़ित परिवार को मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री राहत कोष से सहायता दिलाने की मांग करेंगे। साथ ही राहुल की पत्नी को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए भी प्रशासन से आग्रह किया जाएगा।
गांव में चिंता का माहौल
राहुल अपने पीछे पत्नी और छह माह का दुधमुंहा बच्चा छोड़ गया है। वृद्ध माता-पिता की दवाइयों का खर्च और छोटे भाई-बहनों की पढ़ाई अब अधर में लटक गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द सरकारी मदद नहीं मिली तो परिवार के सामने गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
