रुड़कीहरिद्वार

सीबीआरआई में विश्व धरोहर दिवस का आयोजन

“विरासत संरचनाओं के संरक्षण की आवश्यकता” पर जोर

रुड़की। सीएसआईआर–केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई), रुड़की में मंगलवार को आरएनटी सभागार में विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस वर्ष की थीम “संघर्षों और आपदाओं के संदर्भ में जीवित विरासत के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया” रही। कार्यक्रम का उद्देश्य देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना था।

कार्यक्रम की शुरुआत वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक एवं ओडीएस प्रमुख डॉ. नीरज जैन के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने बताया कि विश्व धरोहर दिवस प्रत्येक वर्ष 18 अप्रैल को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य धरोहर स्थलों के महत्व को समझना और भविष्य की पीढ़ियों के लिए उनके संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना है।

इस अवसर पर संस्थान के निदेशक प्रो. आर. प्रदीप कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि ऐतिहासिक संरचनाओं के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए पारंपरिक निर्माण तकनीकों और आधुनिक विज्ञान का समन्वय आवश्यक है। उन्होंने बताया कि सीबीआरआई विरासत भवनों के संरचनात्मक मूल्यांकन, संरक्षण तकनीकों के विकास और आपदा जोखिम न्यूनीकरण के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रहा है।

कार्यक्रम में आमंत्रित वक्ता के रूप में एमेरिटस वैज्ञानिक डॉ. अचल कुमार मित्तल ने “विरासत संरचनाओं का संरक्षण: समस्या विवरण, केस स्टडी और भविष्य की दिशाएँ” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने संरक्षण से जुड़ी चुनौतियों और संभावित समाधानों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

इस दौरान हेरिटेज एंड स्पेशल स्ट्रक्चर्स समूह की वरिष्ठ वैज्ञानिक हीना गुप्ता ने विश्व धरोहर दिवस 2026 के महत्व पर जानकारी दी, जबकि समूह प्रमुख डॉ. सिद्धार्थ बेहरा ने समूह की गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE-Heritage) पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया।

इसके अलावा, विश्व धरोहर विषय पर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन और राष्ट्रगान के साथ हुआ।

इस आयोजन में संस्थान के वैज्ञानिकों, कर्मचारियों, एसीएसआईआर के छात्रों एवं प्रशिक्षुओं की सक्रिय भागीदारी रही। कार्यक्रम ने विरासत संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण को सुदृढ़ करने का कार्य किया।

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