पौड़ी

शताब्दी समारोह में यादों का संगम, उदय सिंह नेगी ने बताया प्रांतीयकरण का इतिहास

द्वारीखाल/पौड़ी गढ़वाल। राजकीय इंटर कॉलेज सिलोगी के शताब्दी समारोह के दौरान पूर्व छात्र एवं पूर्व अध्यापक उदय सिंह नेगी (ग्राम काण्डी, पट्टी ढांगू निवासी) ने विद्यालय के प्रांतीयकरण की प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने विद्यालय से जुड़ी पुरानी स्मृतियों को साझा करते हुए बताया कि वर्ष 1975 में उन्होंने इसी विद्यालय से हाईस्कूल परीक्षा उत्तीर्ण की थी और बाद में वर्ष 1988 से 1991 तक यहां अध्यापन कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ, जिसे उन्होंने अपने जीवन का सौभाग्य बताया।

नेगी ने बताया कि 30 नवंबर 1990 को इंटर कॉलेज सिलोगी का प्रांतीयकरण हुआ। उस समय विद्यालय के प्रधानाचार्य स्व. गोकुलदेव कुकरेती तथा प्रबंधक स्व. पुरुषोत्तमदत्त बलूनी थे। उन्होंने कहा कि वर्ष 1979 में विद्यालय को इंटरमीडिएट की मान्यता मिल गई थी, लेकिन विज्ञान विषय की मान्यता लंबे समय तक नहीं मिल सकी। उस समय विज्ञान विषय की मान्यता प्राप्त करना अत्यंत कठिन प्रक्रिया थी, जिसकी शर्तें बहुत कठोर थीं। विद्यालय प्रबंधन द्वारा कई प्रयास किए गए, लेकिन बावजूद इसके विज्ञान विषय की मान्यता नहीं मिल सकी। परिणामस्वरूप विज्ञान वर्ग के छात्रों को हाई स्कूल के बाद इंटरमीडिएट की पढ़ाई के लिए अन्य विद्यालयों में जाना पड़ता था, या फिर मजबूरी में उन्हें विज्ञान छोड़कर अन्य विषयों का चयन करना पड़ता था। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए और छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए विद्यालय के राजकीयकरण का विचार प्रमुखता से उभरकर सामने आया, ताकि उन्हें बेहतर शैक्षिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

उन्होंने कहा कि विज्ञान विषय की आवश्यकता को देखते हुए विद्यालय के प्रांतीयकरण का निर्णय लिया गया, जिसके बाद इंटरमीडिएट स्तर पर विज्ञान की मान्यता संभव हो सकी। नेगी ने बताया कि प्रांतीयकरण के दिन वे लखनऊ में थे और सचिवालय से स्वयं शासनादेश लेकर आए थे, जिसकी एक प्रति आज भी उनके पास सुरक्षित है। 5 जनवरी 1991 को विद्यालय का विधिवत अधिग्रहण हुआ।

प्रांतीयकरण के बाद शासन के निर्देशानुसार कुछ अध्यापकों का स्थानांतरण किया गया, जिसमें उदय सिंह नेगी को राजकीय इंटर कॉलेज देवप्रयाग भेजा गया।

इस अवसर पर उन्होंने प्रांतीयकरण काल के दिवंगत प्रधानाचार्य, प्रबंधक, अध्यापक एवं कर्मचारियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए स्व. गोकुलदेव कुकरेती, स्व. पुरुषोत्तमदत्त बलूनी, रमाकांत बडोला, हरिप्रसाद कुकरेती, आजाद सिंह बिष्ट, सुभाष चंद्र सिंह बिष्ट, प्रेमलाल गौड़, कुशाल सिंह कंडारी, संतन सिंह बिष्ट, रमेश चंद्र भट्ट, मनोहरलाल बड़थ्वाल, गोकुल सिंह बिष्ट, प्रधान लिपिक रूपचंद जखमोला, कार्यालय सहायक रमेश चंद्र एवं वाचस्पति कोठारी सहित अन्य दिवंगत जनों को नमन किया। उन्होंने कहा कि इन सभी का विद्यालय के विकास में अमूल्य योगदान रहा है।

नेगी ने राष्ट्रीय पाठशाला की स्थापना, भूमिदान, अध्यापन एवं अन्य क्षेत्रों में योगदान देने वाली विभूतियों—संत सदानंद कुकरेती, भूमिदान दाता तारादत्त भट्ट, नंदादत्त कुकरेती, जानकी प्रसाद कुकरेती, हरिराम जखमोला, योगेश्वरदत्त कुकरेती, प्रबंधक योगेश्वरदत्त बड़थ्वाल (ग्राम अमोला), जितार सिंह रावत (ग्राम कोठार) एवं हरिश्चंद्र भट्ट (ग्राम जल्ली) का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने वर्तमान प्रधानाचार्य विनोद रावत, सुभाष चंद्र कुकरेती, वीरेन्द्र गिरि एवं समस्त आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि इस आयोजन ने पुराने साथियों और गुरुजनों से पुनः मिलने का अवसर प्रदान किया, जिससे वे भावुक हो उठे।

अंत में उन्होंने क्षेत्र में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सिलोगी में एक पॉलिटेक्निक कॉलेज की स्थापना की मांग उठाई और कहा कि इस संबंध में क्षेत्रीय विधायक से भी आग्रह किया जाएगा।

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