परमार्थ निकेतन में अति रुद्रम एवं शतचंडी महायज्ञ का भव्य आयोजन, गूंज रहे वेदमंत्र
15,000 से अधिक रुद्रम मंत्रों और 300+ दुर्गा सप्तशती पाठ से जग रही आध्यात्मिक चेतना
ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में 11 से 18 अप्रैल 2026 तक पावन गंगा तट पर अति रुद्रम एवं शतचंडी महायज्ञ का भव्य एवं दिव्य आयोजन किया जा रहा है। इस महाअनुष्ठान का शुभारम्भ स्वामी चिदानन्द सरस्वती के सान्निध्य में हुआ, जिसमें सनातन संस्कृति, वैदिक परंपराओं और नारी शक्ति के जागरण का सशक्त संदेश दिया गया।
इस आठ दिवसीय अनुष्ठान में 15,000 से अधिक रुद्रम मंत्रों का उच्चारण, 1,500 से अधिक रुद्र होम, 300 से अधिक दुर्गा सप्तशती पाठ एवं 300 से अधिक चंडी होम के माध्यम से आदिशक्ति माँ दुर्गा की आराधना की जा रही है। वेदमंत्रों की गूंज, “हर हर महादेव” और “जय चंडी” के उद्घोष से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो उठा है।

वर्ष 2018 में प्रारंभ हुए इस दिव्य संकल्प का मुख्य उद्देश्य नारी शक्ति को वेदाध्ययन, यज्ञ-हवन एवं आध्यात्मिक साधना में सशक्त बनाना है। सनातन धर्म में नारी को शक्ति स्वरूप मानते हुए माँ दुर्गा, माँ सरस्वती और माँ लक्ष्मी के रूप में पूजित किया जाता है, जो सृष्टि के संतुलन का आधार हैं।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने अपने उद्बोधन में कहा कि “शक्ति ही सृष्टि का आधार है” और शक्ति का संतुलन ही जीवन में समरसता, शांति और विकास लाता है। उन्होंने नारी को सृजन और पोषण का मूल स्वरूप बताते हुए उसके सम्मान और जागरण को मानवता के उत्थान का मार्ग बताया।
इस महायज्ञ में 300 से अधिक विद्वान ऋत्विकों ने सहभाग कर रुद्रम, दुर्गा सप्तशती के साथ रुद्र घनम्, रुद्र क्रमम्, महान्यासम्, अरुण प्राश्नम् और अन्य वैदिक अनुष्ठानों का विधिवत आयोजन किया। श्री अमृतेश्वर्यंबा समेत जी एवं अमृतेश्वरानंदनाथ सरस्वती के मार्गदर्शन में दक्षिण भारत और लंदन से आए विद्वानों की सहभागिता ने आयोजन को और भी विशेष बना दिया।
यह आयोजन न केवल विश्व शांति और सकारात्मक ऊर्जा के प्रसार के लिए समर्पित है, बल्कि युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का भी सशक्त माध्यम बन रहा है।
