ऋषिकेश में सोमवती अमावस्या पर उमड़ा आस्था का सैलाब, राष्ट्र समृद्धि और विश्व शांति के लिए की प्रार्थना
ऋषिकेश। अधिकमास की पावन सोमवती अमावस्या के अवसर पर परमार्थ निकेतन में देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर राष्ट्र समृद्धि, विश्व शांति और मानव कल्याण की कामना की। इस अवसर पर स्वामी चिदानंद सरस्वती, भगीरथी चौधरी, साध्वी भगवती सरस्वती तथा संत मुरलीधर जी के सान्निध्य में श्रद्धालुओं ने मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाई और यज्ञ, ध्यान व दान कार्यक्रमों में सहभाग किया।

इस अवसर पर स्वामी चिदानंद सरस्वती जी ने कहा कि अधिकमास में सोमवती अमावस्या का यह विशेष संयोग लगभग 301 वर्षों बाद आया है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा सौभाग्य मां गंगा के पावन तट पर उपस्थित होना है। उन्होंने विश्व वृद्ध दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस का उल्लेख करते हुए समाज से वृद्धजनों के सम्मान और उनकी सेवा का आह्वान किया।
स्वामी जी ने कहा कि वृद्धजन परिवार की जड़ें और समाज की चेतना हैं। माता-पिता और बुजुर्गों की उपेक्षा हमारी सांस्कृतिक विरासत पर आघात है। उन्होंने कहा कि श्रीराम कथा हमें संस्कार, सम्मान और कर्तव्य का संदेश देती है तथा अहंकार के स्थान पर संस्कारों को अपनाने की प्रेरणा देती है।
पर्यावरण संरक्षण और पितृ सम्मान को जोड़ते हुए स्वामी जी ने “पितृ तर्पण-पेड़ अर्पण” का अभिनव संदेश दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि दिवंगत परिजनों की स्मृति में फलदार पौधों का रोपण किया जाए, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ पूर्वजों का सम्मान भी हो सके। उन्होंने गंगा और अन्य नदियों के किनारों पर हरित गलियारों के निर्माण का संकल्प लेने का आह्वान किया।
संत मुरलीधर जी ने श्रीराम परिवार के आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि रामायण त्याग, सेवा, समर्पण और पारिवारिक उत्तरदायित्व का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज को इन्हीं मूल्यों को अपनाने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने गंगा तट पर विशेष प्रार्थना कर अपने जीवन में संस्कार, सेवा और सम्मान के मूल्यों को अपनाने का संकल्प लिया।
