ऋषिकेश

परमार्थ निकेतन में फ्रांस के योग साधकों ने लिया भारतीय आध्यात्मिकता का अनुभव

गंगा आरती, योग और सत्संग से प्रभावित हुआ विदेशी दल, स्वामी चिदानन्द सरस्वती से की भेंट

ऋषिकेश। देवभूमि ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आकर्षण का केंद्र बना, जब फ्रांस से आए योग साधकों के एक दल ने यहां पहुंचकर भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का सजीव अनुभव किया।

विभिन्न आयु वर्ग के साधकों से युक्त इस दल ने आश्रम पहुंचते ही पारंपरिक भारतीय आतिथ्य और यहां के शांत, पवित्र व ऊर्जावान वातावरण को महसूस किया। आश्रम की दिव्यता से प्रभावित होकर साधकों ने इसे अपने जीवन के सबसे अविस्मरणीय अनुभवों में से एक बताया।

इस दौरान दल ने स्वामी चिदानन्द सरस्वती से भेंट कर योग, ध्यान और सनातन जीवन मूल्यों से जुड़े अपने प्रश्नों का समाधान प्राप्त किया। स्वामी जी ने उन्हें भारतीय योग परंपरा के वैज्ञानिक और आध्यात्मिक पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी।

ध्यान और सत्संग सत्रों के माध्यम से साधकों को आंतरिक शांति, आत्मबोध और जीवन के उद्देश्य पर गहन चर्चा का अवसर मिला। फ्रांस से आए योगियों ने कहा कि इस अनुभव ने उन्हें जीवन को देखने का एक नया दृष्टिकोण प्रदान किया है।

आश्रम में उन्हें भारतीय संस्कृति की विविध विधाओं—चित्रकला, नृत्य, कीर्तन, गरबा और डांडिया—का भी परिचय कराया गया, जिससे वे भारतीय संस्कृति की आत्मा से जुड़ सके।

इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने “वसुधैव कुटुम्बकम्” के सिद्धांत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की आध्यात्मिक धरोहर योग सम्पूर्ण मानवता के लिए एक अनमोल उपहार है, जो शरीर, मन और आत्मा को जोड़ने का कार्य करती है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक चुनौतियों के दौर में योग, ध्यान और आध्यात्मिकता ही वह मार्ग हैं, जो मानव जीवन में शांति, संतुलन और स्थिरता ला सकते हैं। साथ ही उन्होंने विदेशी साधकों से अपील की कि वे अपने देश लौटकर इन मूल्यों का प्रसार करें।

यह आयोजन एक बार फिर दर्शाता है कि ऋषिकेश विश्वभर के लोगों के लिए आध्यात्मिक सीख और आत्मिक शांति का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *