परमार्थ निकेतन में योग टीचर ट्रेनिंग, दुनिया भर के साधकों को मिल रही आध्यात्मिक दिशा
ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में आयोजित योग टीचर ट्रेनिंग कोर्स इन दिनों वैश्विक आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस कोर्स में विश्व के विभिन्न देशों से पहुंचे योग जिज्ञासु योग के व्यावहारिक और सैद्धांतिक पहलुओं को सीखने के साथ भारतीय सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं को भी आत्मसात कर रहे हैं।

कोर्स के दौरान प्रतिभागियों को परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती का सान्निध्य प्राप्त हुआ। स्वामी जी ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में कहा कि “योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का दिव्य माध्यम है।” उनके विचारों ने उपस्थित साधकों को गहराई से प्रभावित किया।
अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और एशिया सहित कई देशों से आए प्रतिभागी योग, ध्यान, प्राणायाम, गीता अध्ययन, यज्ञ, सत्संग और गंगा आरती के माध्यम से भारतीय संस्कृति के मूल तत्वों का अनुभव कर रहे हैं। गंगा तट पर ध्यान और परमार्थ निकेतन का आध्यात्मिक वातावरण उन्हें मानसिक शांति और जीवन के गहन प्रश्नों के उत्तर प्रदान कर रहा है।
परमार्थ स्कूल ऑफ योग द्वारा संचालित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम अत्यंत व्यापक है, जिसमें वेदान्त, गीता सार, ईशोपनिषद, तत्वबोध, क्रिया योग, शक्ति साधना और योग निद्रा जैसी प्राचीन विधाओं का समावेश किया गया है। इसका उद्देश्य प्रतिभागियों को न केवल एक सक्षम योग शिक्षक बनाना है, बल्कि उन्हें जीवन के उच्च उद्देश्य की ओर प्रेरित करना भी है।
सत्र के दौरान साधकों ने जीवन के उद्देश्य, मानसिक तनाव और आध्यात्मिक मार्ग से जुड़े प्रश्न भी प्रस्तुत किए, जिनका समाधान स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने सरल और करुणामय शैली में किया। उनके उत्तरों ने प्रतिभागियों के मन में गहरी छाप छोड़ी।
स्वामी जी ने युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़ने और योग के माध्यम से जीवन को सार्थक बनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में योग की आवश्यकता पहले से अधिक है, क्योंकि यह व्यक्ति और समाज दोनों के लिए संतुलन और शांति का मार्ग प्रशस्त करता है।
प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि परमार्थ निकेतन में बिताया गया समय उनके जीवन का एक परिवर्तनकारी चरण है। अनुशासित दिनचर्या, गंगा आरती और सत्संग के माध्यम से उन्हें आंतरिक शांति और आत्मिक आनंद की अनुभूति हो रही है।
परमार्थ निकेतन “वसुधैव कुटुम्बकम्” के संदेश को विश्वभर में फैलाने का कार्य करता रहा है। यहाँ आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग कार्यक्रम वैश्विक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संवाद को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
इस योग टीचर ट्रेनिंग कार्यक्रम में योगाचार्य आभा सरस्वती, डॉ. इंदू शर्मा, गंगा नंदिनी और गायत्री गुप्ता का विशेष योगदान
