परमार्थ निकेतन में श्रद्धा-भक्ति से मनी हनुमान जयंती, योग, सुंदरकांड पाठ और आध्यात्मिक प्रवचनों से गूंजा गंगा तट
ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में श्री हनुमान जयंती का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती एवं साध्वी भगवती सरस्वती के सान्निध्य में विविध आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें देश-विदेश से आये श्रद्धालुओं ने भाग लेकर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया।

प्रातःकालीन बेला में परमार्थ निकेतन के पावन हनुमान घाट पर विशेष योग सत्र का आयोजन किया गया। गंगा तट पर गंगा नन्दिनी जी के मार्गदर्शन में आयोजित इस योग सत्र में प्रतिभागियों ने प्राणायाम, ध्यान एवं योगाभ्यास के माध्यम से तन-मन को संतुलित करने के साथ आध्यात्मिक चेतना को जागृत किया।
हनुमान जयंती के अवसर पर रामचरितमानस के सुंदरकांड का सामूहिक पाठ भी श्रद्धा एवं भक्ति भाव से सम्पन्न हुआ। भजन-कीर्तन और मंत्रोच्चारण से सम्पूर्ण परिसर भक्तिमय वातावरण में डूब गया, जिससे श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
कार्यक्रम में नारी रत्न श्रीमती राजेश्वरी मोदी ने ‘कुबेर का खजाना’ विषय पर अपने विचार साझा करते हुए जीवन में सकारात्मक सोच, संतुष्टि और सेवा भावना के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सच्चा खजाना हमारे भीतर की कृतज्ञता और संतुलन में निहित है।
इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि “आत्मो मोक्षार्थं जगत् हिताय च” के सिद्धांत पर चलते हुए व्यक्ति को पहले स्वयं का कल्याण करना चाहिए, तभी वह समाज को भी प्रकाश दे सकता है। उन्होंने हनुमान जी के जीवन से सेवा, समर्पण और स्मरण के तीन मूल मंत्र अपनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि हनुमान चालीसा केवल स्तुति नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाला दिव्य मार्गदर्शन है।
वहीं साध्वी भगवती सरस्वती जी ने अपने उद्बोधन में हनुमान जी के जीवन से प्रेरणा लेकर निःस्वार्थ सेवा, अटूट विश्वास और पूर्ण समर्पण को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में श्री श्याम सुन्दर काबरा, श्री गिरधर गोपाल असोपा, श्री सनील असोपा, श्री रमन शाह, श्री मनोज राठी, श्री लक्ष्मीनारायण, निशा जैन, शशि राठी एवं श्री गोपाल सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
