उत्तराखंड

सेवानिवृत्ति पर विशेष: संघर्ष से सफलता तक डॉ. कुसुमलता रतूड़ी का प्रेरक सफर

रुड़की/पौड़ी गढ़वाल। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, इकबालपुर रुड़की की वरिष्ठ शिक्षिका डॉ. कुसुमलता रतूड़ी 31 मार्च को अपने दीर्घ एवं उत्कृष्ट शैक्षणिक सेवा कार्यकाल के बाद सेवानिवृत्त हो गईं। उनके सेवानिवृत्ति अवसर पर विद्यालय परिवार एवं क्षेत्रवासियों ने गरिमामयी विदाई दी।

डॉ. रतूड़ी का जीवन संघर्ष, समर्पण और शिक्षा के प्रति अटूट निष्ठा का जीवंत उदाहरण है। उनका जन्म जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकास खण्ड द्वारीखाल के ग्राम बागों में हुआ। उन्होंने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा प्राथमिक विद्यालय उत्तिण्डा से प्राप्त की तथा इंटरमीडिएट तक की शिक्षा इंटर कॉलेज सिलोगी, पौड़ी गढ़वाल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने हिंदी विषय में एमए एवं तत्पश्चात पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।

वर्ष 1994 में उनकी प्रथम नियुक्ति राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, बीरोंखाल (पौड़ी गढ़वाल) में हुई, जहां से उन्होंने अपने शिक्षण जीवन की शुरुआत की और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया।

डॉ. कुसुमलता रतूड़ी, माता श्रीमती आनंदी देवी एवं पिता श्री रामनाथ कोठारी की सात संतानों में सबसे बड़ी हैं। उन्होंने उस दौर में शिक्षा प्राप्त की, जब ग्रामीण क्षेत्रों में बालिकाओं की शिक्षा को अधिक महत्व नहीं दिया जाता था और अधिकांश लड़कियां पांचवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ देती थीं।

विषम परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने हौसले को कमजोर नहीं होने दिया। घर के कार्यों में अपनी माता का हाथ बंटाते हुए वे नियमित रूप से स्कूल जाती थीं। इतना ही नहीं, स्कूल से लौटते समय जंगल से घास का गट्ठर (बिटकी) लेकर घर आना भी उनकी दिनचर्या का हिस्सा था।

उनकी इसी संघर्षमयी जीवन यात्रा ने उन्हें एक मजबूत व्यक्तित्व के रूप में स्थापित किया। शिक्षा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।

 

डॉ. रतूड़ी के जीवन संघर्ष पर आधारित “कमली” नामक एक गढ़वाली लघु फिल्म भी बनाई गई है, जो समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई है।

उनका जीवन दर्शन और संघर्ष की कहानी आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी। शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा।

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