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विश्व जल दिवस पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती का संदेश: “जल है तो कल है, हर बूंद बचाना हम सबकी जिम्मेदारी”

ऋषिकेश, 22 मार्च 2026। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने विश्व जल दिवस के अवसर पर जल संरक्षण का सशक्त संदेश देते हुए कहा कि जल ही जीवन का आधार है और हमारे ग्रह के भविष्य को निर्धारित करता है। उन्होंने कहा कि मानव सभ्यता का विकास सदैव नदियों के किनारे हुआ है और आज भी हमारा अस्तित्व पूरी तरह जल पर निर्भर है, लेकिन इसके बावजूद जल के प्रति हमारी लापरवाही लगातार बढ़ती जा रही है।

स्वामी जी ने कहा कि जल का निर्माण संभव नहीं है, लेकिन उसका संरक्षण पूरी तरह हमारे हाथ में है। “जल ही जीवन है और इसकी हर बूंद अमृत के समान अनमोल है,” उन्होंने कहा। उन्होंने लोगों से अपील की कि जल संरक्षण को केवल एक दिन का अभियान न मानकर इसे अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं।

उन्होंने कहा कि बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण, औद्योगिक विस्तार और जलवायु परिवर्तन के कारण जल संकट दिन-प्रतिदिन गहराता जा रहा है। आज भी दुनिया के कई हिस्सों में लोग स्वच्छ पेयजल के लिए संघर्ष कर रहे हैं, ऐसे में जल संरक्षण अब विकल्प नहीं बल्कि अनिवार्य जिम्मेदारी बन गया है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने सुझाव दिया कि छोटे-छोटे प्रयासों से भी बड़ा परिवर्तन संभव है। घरों में जल का विवेकपूर्ण उपयोग, वर्षा जल संचयन को अपनाना, अनावश्यक रूप से नल खुले न छोड़ना और समाज में जागरूकता फैलाना जैसे कदम जल-सुरक्षित भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगे।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जल संरक्षण केवल सरकार या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। जब समाज का हर व्यक्ति जल के महत्व को समझेगा और संरक्षण में भागीदारी निभाएगा, तभी एक सशक्त और जल-संपन्न राष्ट्र का निर्माण संभव होगा।

स्वामी जी ने कहा कि नदियाँ केवल जलधाराएं नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, संस्कृति और संस्कारों की वाहक हैं। गंगा नदी और यमुना नदी जैसी पावन नदियाँ हमारी आस्था और सांस्कृतिक विरासत की जीवंत प्रतीक हैं। इनके तटों पर न केवल जीवन, बल्कि परंपराएं और आध्यात्मिक चेतना भी विकसित होती हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नदियों का अस्तित्व समाप्त होता है तो केवल जल संकट ही नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान भी खतरे में पड़ जाएगी। “नदियां नहीं होंगी तो न कुंभ होगा और न ही प्रयाग,” उन्होंने कहा।

अंत में उन्होंने सभी से आह्वान किया कि विश्व जल दिवस 2026 पर संकल्प लें कि जल का सम्मान करेंगे, उसका संरक्षण करेंगे और एक भी बूंद व्यर्थ नहीं बहने देंगे।

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