अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव का तीसरा दिन: महर्षि महेश योगी आश्रम में ध्यान, संगीत और प्रार्थना से गूंजा आध्यात्मिक वातावरण
ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव 2026 के तीसरे दिन महर्षि महेश योगी आश्रम (बीटल्स आश्रम) की पवित्र भूमि पर ध्यान, संगीत और प्रार्थना के माध्यम से विश्व के साधक एक सूत्र में बंधे दिखाई दिए। कार्यक्रम परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती और डा. साध्वी भगवती सरस्वती के पावन सान्निध्य में आयोजित हुआ, जिसमें विश्व शांति और आध्यात्मिक जागरण के लिए विशेष ध्यान साधना कराई गई।

विश्व के विभिन्न देशों से आए योग साधकों ने सामूहिक ध्यान और मंत्रोच्चार के माध्यम से आंतरिक शांति और दिव्य ऊर्जा का अनुभव किया। इस अवसर पर डा. साध्वी भगवती सरस्वती ने गाइडेड मेडिटेशन कराते हुए प्रतिभागियों को आत्मिक शांति और चेतना से जुड़ने का मार्ग दिखाया।
इस दौरान पर्यावरण संरक्षण और हरित संवर्द्धन का संदेश देते हुए रुद्राक्ष के पौधों का रोपण किया गया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि यह वही पावन स्थल है जहां कभी प्रसिद्ध बैंड बीटल्स ने ध्यान साधना की थी और आज भी यह स्थान विश्वभर के साधकों को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान कर रहा है।
कार्यक्रम में प्रसिद्ध कीर्तन गायक राधिका दास के भक्ति कीर्तन ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। वहीं विश्व प्रसिद्ध ड्रम वादक शिवमणि की ताल ने पूरे वातावरण को ब्रह्मनाद से जोड़ दिया। प्रसिद्ध गायिका रूना रिजवी शिवमणि की सूफियाना आवाज ने इस आध्यात्मिक आयोजन को और भी दिव्य बना दिया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि शक्ति, भक्ति, संगीत और शांति का संगम है। योग दिलों को जोड़ता है, देशों को जोड़ता है और मानवता को एक सूत्र में बांधता है। उन्होंने वैश्विक योग समुदाय का आह्वान करते हुए कहा कि योग के माध्यम से विश्व शांति और मानवीय एकता का संदेश फैलाया जा सकता है।
इस अवसर पर डा. साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव भारत की सनातन आध्यात्मिक विरासत का जीवंत उत्सव है, जो लोगों को स्वयं से, समाज से और सम्पूर्ण मानवता से जोड़ता है।
महोत्सव के दौरान प्रतिभागियों ने मां गंगा में पवित्र स्नान कर ध्यान, प्रार्थना और साधना के माध्यम से आत्मिक शुद्धि का अनुभव किया। प्रातःकालीन सत्रों में हठ योग, कुंडलिनी योग, विन्यास योग, प्राण विन्यास, चीगोंग, आयुर्वेद, योग थेरेपी और ध्यान जैसे विभिन्न विषयों पर अंतरराष्ट्रीय योगाचार्यों ने सत्रों का संचालन किया।
दिनभर चले सत्रों में योगाचार्य दुर्गेश अमोली, दासा दास, डॉ. ईडन गोल्डमैन, हर हरि सिंह, जाह्नवी क्लेयर मिसिंघम, शिवा रे, संदीप देसाई, नीरू कठपाल, मयंक भट्ट, रोहिणी मनोहर, किआ मिलर, सुधांशु शर्मा, मोहन भंडारी, टॉमी रोसेन सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय योग विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को योग और ध्यान की विभिन्न विधाओं का अभ्यास कराया।
शाम को परमार्थ निकेतन के गंगा तट पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती और साध्वी भगवती सरस्वती के सान्निध्य में गंगा आरती और कीर्तन का आयोजन हुआ, जिसमें विश्वभर से आए साधकों ने भाग लिया। भक्ति संगीत और कीर्तन से पूरा गंगा तट आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठा।
गौरतलब है कि परमार्थ निकेतन में आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव आयुष मंत्रालय और भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय (अतुल्य भारत) के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है, जिसमें 80 से अधिक देशों के 1500 से अधिक प्रतिभागी पूरे सप्ताह भाग ले रहे हैं।
