अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव की तैयारियाँ तेज, परमार्थ निकेतन से सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त विश्व का संदेश
ऋषिकेश। देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरती ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन में अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव की तैयारियाँ पूरे उत्साह और ऊर्जा के साथ चल रही हैं। विश्व के कई देशों से आने वाले योगाचार्य, साधक और योग जिज्ञासु यहां योग, ध्यान और आध्यात्मिकता के माध्यम से मानवता को एकता का संदेश देने के लिए एकत्रित हो रहे हैं।

इस महोत्सव की एक खास विशेषता प्रकृति संरक्षण और सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त विश्व का संकल्प भी है। महोत्सव की तैयारियों के दौरान यहां आने वाले पर्यटकों, श्रद्धालुओं और योग साधकों को कपड़े के झोले भेंट किए जा रहे हैं, ताकि उन्हें पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जा सके।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि परमार्थ निकेतन द्वारा दिए जा रहे कपड़े के झोले केवल एक उपहार नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और जागरूकता का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति प्लास्टिक की जगह कपड़े का झोला अपनाता है, तो वह प्रकृति के प्रति अपनी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का परिचय देता है।
उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और पर्यावरणीय संकट की चुनौती से जूझ रही है। नदियां प्रदूषित हो रही हैं, जंगल सिमट रहे हैं और पृथ्वी का संतुलन लगातार बिगड़ता जा रहा है। ऐसे में हमें अपनी दिनचर्या में बदलाव लाकर पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनना होगा।
स्वामी जी ने कहा कि “प्रकृति, संस्कृति और संतति की सुरक्षा के लिए हमें अपनी जीवनशैली में परिवर्तन करना होगा।” उन्होंने लोगों से सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग बंद करने, कपड़े के झोले अपनाने, जल और ऊर्जा की बचत करने तथा पौधारोपण जैसे कदम उठाने का आह्वान किया।
उन्होंने यह भी कहा कि योग का वास्तविक अर्थ संतुलन है। जिस प्रकार योग शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करता है, उसी प्रकार हमें प्रकृति के साथ भी संतुलित संबंध बनाना होगा।
अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के अवसर पर परमार्थ निकेतन से उठ रहा यह संदेश केवल ऋषिकेश या उत्तराखंड तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए एक प्रेरणा बन रहा है। योग की इस पावन भूमि से यह आह्वान किया जा रहा है कि पृथ्वी की रक्षा करना ही मानवता के भविष्य की रक्षा करना है।
