स्वामी चिदानन्द सरस्वती का संदेश: होलिका दहन में जलाएँ नकारात्मकता, रंगों से सशक्त भारत का लें संकल्प
ऋषिकेश, 2 मार्च। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष एवं स्वामी शुकदेवानन्द ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने देशवासियों को होलिका दहन की शुभकामनाएँ देते हुए इसे सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय चेतना का महायज्ञ बताया।
उन्होंने कहा कि होलिका दहन की पावन अग्नि सभी के जीवन की नकारात्मकता, भय और दुखों को जलाकर सुख, शांति, प्रेम और नई ऊर्जा का प्रकाश भर दे। माँ गंगा से प्रार्थना करते हुए उन्होंने सभी के जीवन को रंगों की तरह उज्ज्वल और आनंदमय होने की कामना की।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि होली केवल एक पर्व नहीं, बल्कि बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश है। होलिका दहन हमारे भीतर छिपी ईर्ष्या, द्वेष, क्रोध और विभाजनकारी विचारों को त्यागने का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आज समाज में फैल रहे भ्रम, भेदभाव और नकारात्मक प्रवृत्तियों के बीच होली सकारात्मकता, विश्वास और राष्ट्रनिर्माण का संकल्प लेने का अवसर प्रदान करती है।
उन्होंने कहा कि विविधताओं से सजे भारत में भाषा, वेशभूषा और परंपराएँ भिन्न हो सकती हैं, लेकिन एकता ही देश की असली पहचान है। होली इसी एकता का जीवंत और रंगीन प्रमाण है। लाल रंग साहस का, पीला ज्ञान का, हरा समृद्धि का, नीला असीमता का और गुलाबी प्रेम व करुणा का प्रतीक है। जब सभी रंग मिलते हैं तो एक सुंदर चित्र बनता है, उसी प्रकार जब समाज के सभी वर्ग एकजुट होते हैं तो राष्ट्र सशक्त बनता है।
स्वामी जी ने युवाओं से सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने, स्वदेशी का सम्मान करने, पर्यावरण संरक्षण, जल बचाने और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि “मैं” से “हम” की यात्रा ही सच्चे राष्ट्रनिर्माण का मार्ग है।
उन्होंने अपील की कि इस वर्ष होली को सेवा, स्वच्छता, सद्भाव और राष्ट्रगौरव के संकल्प के साथ मनाया जाए। प्राकृतिक रंगों के प्रयोग और जल संरक्षण पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि प्रतीकात्मक रूप से लकड़ियों के स्थान पर गोबर के उपलों से होलिका दहन किया जाए, जिससे संस्कृति और प्रकृति दोनों की रक्षा हो सके।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि यदि 140 करोड़ भारतीय सकारात्मकता और एकता का संकल्प लें, तो भारत विश्व के लिए मार्गदर्शक प्रकाश बन सकता है। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि होलिका दहन की अग्नि में अपनी नकारात्मकता समर्पित कर प्रेम, विश्वास और एकता के रंगों से सशक्त एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का संकल्प लें।
