दीदी कैफे बना महिला स्वरोजगार का सफल मॉडल, पहाड़ी व्यंजनों से हर माह लाखों का टर्नओवर
पौड़ी गढ़वाल। उत्तराखंड में महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार प्रभावी पहल की जा रही है। इसी क्रम में पौड़ी जनपद के विकासखंड पौड़ी मुख्यालय में संचालित दीदी कैफे ने अल्प समय में अपनी एक अलग पहचान बना ली है।

15 अगस्त 2023 को शुरू हुए दीदी कैफे के माध्यम से जहां स्थानीय स्वयं सहायता समूह की महिलाएं रोजगार से जुड़ रही हैं, वहीं पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों को बढ़ावा देकर यह कैफे क्षेत्र के लिए आकर्षण का केंद्र भी बन गया है। कैफे का संचालन समूह की चार महिलाएं एवं दो पुरुष रसोइये कर रहे हैं। यहां आने वाले लोगों को पहाड़ी दाल, चौंसा, लाल चावल का भात, कंडाली की सब्जी, मंडुवे की रोटी सहित विभिन्न पारंपरिक व्यंजन परोसे जा रहे हैं। विशेष रूप से मंडुवे के मोमो लोगों की पहली पसंद बन चुके हैं, जिनकी मांग लगातार बढ़ रही है।
गौरतलब है कि दीदी कैफे के भवन का मरम्मत कार्य जिला योजना के माध्यम से कराया गया है। वहीं हिमोत्थान समिति, देहरादून (टाटा ट्रस्ट) के सहयोग से कैफे को बर्तन एवं आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई गई, जिससे कैफे की सुविधाओं में सुधार हुआ और संचालन को मजबूती मिली। कैफे से प्रतिदिन औसतन 3500 से 4 हजार रुपये की आय हो रही है, जबकि मासिक टर्नओवर 1 से 1.20 लाख रुपये तक पहुंच चुका है। वार्षिक टर्नओवर लगभग 12 से 13 लाख रुपये है, जिसमें से 4.50 से 5 लाख रुपये की शुद्ध बचत हो रही है।
दीदी कैफे में स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले पर्यटक और आगंतुक भी बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं, जिससे समूह से जुड़ी महिलाओं को नियमित रोजगार मिल रहा है और स्थानीय उत्पादों को भी नया बाजार मिल रहा है।
मुख्य विकास अधिकारी गिरीश गुणवंत ने कहा कि दीदी कैफे महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में एक सफल मॉडल बनकर उभरा है। स्थानीय पहाड़ी व्यंजनों को बाजार से जोड़कर महिलाओं की आय बढ़ाई जा रही है। उन्होंने कहा कि दीदी कैफे के माध्यम से महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं और यह पहल अन्य स्वयं सहायता समूहों के लिए भी प्रेरणादायक सिद्ध हो रही है।
सूचना एवं लोक संपर्क विभाग, पौड़ी गढ़वाल
