प्रयागराज संगम तट पर श्री जगन्नाथ धाम की प्राण प्रतिष्ठा, राष्ट्रीय एकता का बना प्रतीक
प्रयागराज, 25 फरवरी। तीर्थराज प्रयागराज की पावन त्रिवेणी संगम स्थली पर स्थित परमार्थ त्रिवेणी पुष्प में भगवान श्री जगन्नाथ धाम की स्थापना एवं प्राण प्रतिष्ठा का दिव्य और ऐतिहासिक अवसर अत्यंत श्रद्धा व आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ सम्पन्न हो रहा है। पांच दिवसीय यह अनुष्ठान परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के नेतृत्व एवं सान्निध्य में आयोजित किया जा रहा है।

अनुष्ठान के चतुर्थ दिवस मोहन चरण माझी (मुख्यमंत्री, ओडिशा) की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समन्वय का स्वरूप प्रदान किया। इस अवसर पर अनेक संत, विद्वान, जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु उपस्थित रहे तथा राष्ट्र की शांति, समृद्धि और पर्यावरण संरक्षण हेतु प्रार्थना की गई।
समारोह के अंतर्गत प्रातःकाल देव स्नान, मंदिर स्नान, वैदिक मंत्रोच्चार, यज्ञ एवं हवन सम्पन्न हुए। यह आयोजन श्री विनोद बागरोडिया, श्री रजत बागरोडिया, श्रीमती उपासना बागरोडिया एवं आभा बागरोडिया चैरिटेबल ट्रस्ट के सौजन्य से सम्पन्न हो रहा है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि भगवान श्री जगन्नाथ ‘जगत के नाथ’ हैं और यह धाम आध्यात्मिक चेतना, सेवा और संस्कार का केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि ओडिशा के मुख्यमंत्री की उपस्थिति उत्तर और पूर्व भारत की सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ करेगी।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि संगम तट पर श्री जगन्नाथ धाम की स्थापना ओडिशा और उत्तर प्रदेश के मध्य सांस्कृतिक सेतु का कार्य करेगी तथा ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को सशक्त बनाएगी।
संध्या समय परमार्थ न्यू अरैल घाट पर माँ गंगा की भव्य आरती आयोजित हुई, जिसमें मुख्यमंत्री ने सहभागिता कर पर्यावरण संरक्षण और नदी स्वच्छता का संकल्प दोहराया।
इस अवसर पर पूर्व राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी का श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया। साथ ही योगी आदित्यनाथ एवं नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की गई।
कार्यक्रम में अनेक संतों, जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों एवं श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। आयोजन के सफल संचालन हेतु प्रशासन, पुलिस एवं नगर निगम के सहयोग की सराहना की गई।
यह धाम अब संगम क्षेत्र को एक नए आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक तीर्थ के रूप में स्थापित करेगा, जहां देश-विदेश से श्रद्धालु आकर प्रेरणा प्राप्त करेंगे।
