पौड़ी

जनगणना-2027 की तैयारी तेज, पौड़ी में तीन दिवसीय डिजिटल प्रशिक्षण कार्यशाला शुरू

पौड़ी गढ़वाल। आगामी जनगणना-2027 की तैयारियों के तहत जिला कार्यालय सभागार में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारम्भ हुआ। इस अवसर पर जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने चार्ज अधिकारियों, चार्ज सहायकों एवं संबंधित कर्मचारियों को प्रशिक्षण को पूर्ण गंभीरता एवं उत्तरदायित्व के साथ ग्रहण करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने कहा कि जनगणना एक अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जिसकी सूचनाएँ देश की विकास नीतियों, योजनाओं एवं संसाधनों के न्यायसंगत वितरण का आधार बनती हैं। इसे शत-प्रतिशत शुद्धता एवं पारदर्शिता के साथ संपन्न करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने जनगणना निदेशालय से आए अधिकारियों से अपेक्षा की कि प्रशिक्षण सत्र व्यवहारिक, संवादात्मक एवं रोचक हों, ताकि फील्ड स्तर पर किसी प्रकार की कठिनाई न आए।

उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित अधिकारी ही इस महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम की सफलता की कुंजी हैं और उनके माध्यम से ही विश्वसनीय एवं प्रमाणिक आंकड़े संकलित किए जा सकेंगे। साथ ही आमजन के सहयोग को आवश्यक बताते हुए उन्होंने जनजागरूकता बढ़ाने पर विशेष बल दिया, ताकि प्रत्येक नागरिक सही एवं पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराए।

गौरतलब है कि देश में पूर्व जनगणना वर्ष 2011 में संपन्न हुई थी। आगामी जनगणना-2027 का प्रथम चरण (मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना) वर्ष 2026 में तथा द्वितीय चरण (जनसंख्या गणना) वर्ष 2027 में प्रस्तावित है। राज्य में प्रथम चरण का कार्य 25 अप्रैल 2026 से 24 मई 2026 तक संचालित होगा। इसके अतिरिक्त 10 अप्रैल 2026 से 24 अप्रैल 2026 तक स्व-गणना की सुविधा उपलब्ध रहेगी, जिसके अंतर्गत परिवार वेब पोर्टल के माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे, जिसका बाद में प्रगणक द्वारा सत्यापन किया जाएगा।

द्वितीय चरण के अंतर्गत जनसंख्या गणना का कार्य 09 फरवरी 2027 से 28 फरवरी 2027 तक संचालित होगा। उत्तराखंड राज्य के हिमाच्छादित क्षेत्रों में विशेष प्रावधान के तहत यह कार्य 11 सितम्बर 2026 से 30 सितम्बर 2026 तक किया जाएगा।

इस बार की जनगणना ऐतिहासिक एवं विशेष होगी, क्योंकि यह प्रथम अवसर होगा जब संपूर्ण प्रक्रिया शत-प्रतिशत डिजिटल माध्यम से संपादित की जाएगी। प्रगणक एवं पर्यवेक्षक अपने मोबाइल फोन के माध्यम से एप आधारित प्रणाली से आंकड़ों का संकलन करेंगे। संचालन, पर्यवेक्षण एवं प्रबंधन हेतु जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली (सीएमएमएस पोर्टल) का उपयोग किया जाएगा। डिजिटल प्रणाली लागू होने से आंकड़ों की गुणवत्ता, सटीकता एवं त्वरित संकलन में उल्लेखनीय सुधार अपेक्षित है।

अपर जिलाधिकारी अनिल गर्ब्याल ने कहा कि जनगणना कार्य केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि संवैधानिक दायित्व है। उन्होंने चार्ज अधिकारियों को सूक्ष्म स्तर पर तैयारी सुनिश्चित करने, सीमाओं का सही निर्धारण करने तथा किसी भी प्रकार की पुनरावृत्ति या छूट न होने देने के निर्देश दिए। उन्होंने फील्ड मॉनिटरिंग को प्राथमिकता देने पर बल दिया।

उपनिदेशक जनगणना निदेशालय प्रवीण कुमार ने बताया कि प्रशासनिक संरचना के तहत जनपद के प्रत्येक तहसील एवं नगर को एक विशिष्ट जनगणना चार्ज के रूप में चिन्हित किया गया है। प्रत्येक चार्ज में नामित चार्ज अधिकारी जियो-टैगिंग, हाउस लिस्टिंग ब्लॉकों का निर्माण, सीमाओं का निर्धारण एवं सत्यापन, फील्ड कार्य की निगरानी तथा वेब पोर्टल एवं सीएमएमएस के माध्यम से समग्र प्रबंधन का दायित्व निभाएंगे। प्रशिक्षण व्यवस्था भी पूर्णतः डिजिटल प्रणाली के अनुरूप संचालित की जा रही है।

प्रशिक्षण सत्र में जनगणना की प्रक्रिया, प्रपत्रों की भराई, क्षेत्र निर्धारण, वेब मैपिंग ऐप एवं क्रिएटर ऐप के माध्यम से जियो-टैगिंग, निगरानी एवं रिपोर्टिंग प्रणाली पर विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।

कार्यशाला में तहसीलदार दीवान सिंह राणा, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी हेमंत काला, मास्टर ट्रेनर शिवकुमार एवं कमल सहित सभी नामित चार्ज अधिकारी उपस्थित रहे।

सूचना एवं लोक संपर्क विभाग, पौड़ी गढ़वाल

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