ऋषिकेश

परमार्थ निकेतन में महाशिवरात्रि श्रद्धा और आध्यात्मिक गरिमा के साथ संपन्न

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में महाशिवरात्रि का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और आध्यात्मिक गरिमा के साथ मनाया गया। आश्रम परिसर “हर-हर महादेव” और “ॐ नमः शिवाय” के गगनभेदी जयघोषों से गुंजायमान हो उठा। सम्पूर्ण वातावरण शिवमय हो गया और गंगा तट पर अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ।

परमार्थ गुरूकुल के आचार्यों व ऋषिकुमारों ने भगवान शिव की भव्य बारात निकाली। वेदमंत्रों के उच्चारण, ताल-नगाड़ों की गूंज और शंखध्वनि के साथ निकली यह शोभायात्रा आश्रम परिसर से होते हुए गंगा तट तक पहुँची, जहाँ भक्तों ने पुष्पवर्षा कर शिवबारात का स्वागत किया।

महाशिवरात्रि रिट्रीट में देश-विदेश से आए साधक, योगी और श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल हुए। ऋषिकुमारों द्वारा रुद्राष्टाध्यायी, महामृत्युंजय मंत्र और शिव स्तोत्रों के सस्वर पाठ ने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया। डमरू और नगाड़ों की ताल पर श्रद्धालु नृत्य और कीर्तन में लीन हो गए।

संध्याकाल में विशेष शिवाभिषेक का आयोजन किया गया। गंगाजल, दुग्ध, दही, मधु, बिल्वपत्र और पुष्पों से भगवान शिव का अभिषेक किया गया। सामूहिक रूप से “ॐ नमः शिवाय” के जप के साथ श्रद्धालुओं ने अपने भीतर के अहंकार, क्रोध और अज्ञान को त्यागने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने अपने संदेश में कहा कि महाशिवरात्रि चेतना की रात्रि है, जो हमें अंधकार से प्रकाश और सीमितता से अनंतता की ओर ले जाती है। उन्होंने कहा कि शिव का अर्थ है कल्याण। जब हम अपने भीतर के विकारों को त्यागते हैं, तब जीवन शिवमय बन जाता है। तप, त्याग, सेवा और ध्यान के माध्यम से मन को शिवालय बनाया जा सकता है।

रात्रि में जागरण एवं सत्संग का आयोजन हुआ। भजन-कीर्तन, ध्यान और साधना के साथ श्रद्धालु पूरी रात शिवनाम में लीन रहे। परमार्थ गंगा तट पर आयोजित सामूहिक ध्यान ने साधकों को आत्मिक शांति और ऊर्जा का अनुभव कराया।

महाशिवरात्रि के इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने अपने मन को कैलाश और हृदय को गंगाजल सा निर्मल बनाने का संकल्प लिया।

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