परमार्थ निकेतन में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित
ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में आज पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि के अवसर पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर वक्ताओं ने उनके जीवन, विचारों और राष्ट्र निर्माण में उनके अमूल्य योगदान को स्मरण किया।

वक्ताओं ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने अपने संपूर्ण जीवन को मूल्यों, नैतिकता और मातृभूमि की सेवा के लिए समर्पित किया। वे देश की आत्मा और संस्कृति के सशक्त स्तंभ थे। उनका जीवन, उनके सिद्धांत और उनके आदर्श आज भी प्रत्येक भारतीय के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का स्रोत हैं।
उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का व्यक्तित्व सादगी, दृढ़ता और समाज सेवा के प्रति समर्पण का प्रतीक था। उनका मानना था कि राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी अर्थव्यवस्था या सैन्य सामर्थ्य में नहीं, बल्कि उसके नागरिकों के चरित्र, नैतिक मूल्यों और जागरूकता में निहित है। उन्होंने समाज के प्रत्येक वर्ग में सदाचार, आत्मनिर्भरता और देशभक्ति की भावना को जागृत करने पर बल दिया।
कार्यक्रम में उनके ‘एकात्म मानववाद’ के दर्शन को विशेष रूप से स्मरण किया गया। वक्ताओं ने कहा कि इस विचारधारा के माध्यम से उन्होंने स्पष्ट किया कि समाज का प्रत्येक व्यक्ति—चाहे वह किसी भी वर्ग से संबंधित हो—राष्ट्र निर्माण में समान रूप से सहभागी है। उनके अनुसार विकास केवल भौतिक समृद्धि तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक, मानसिक और आध्यात्मिक उन्नयन में भी निहित है।
उन्होंने भारतीय संस्कृति और परंपराओं को आधुनिकता के साथ जोड़ने का अद्वितीय प्रयास किया। समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान और आत्मनिर्भरता के लिए उनके प्रयास आज भी प्रासंगिक हैं।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित जनों ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के विचारों को आत्मसात कर राष्ट्रहित में कार्य करने का संकल्प लिया।
