शब्द जब जिम्मेदारी से लिखे जाते हैं, तो इतिहास बनता है: स्वामी चिदानन्द सरस्वती
ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने भारतीय समाचारपत्र दिवस के अवसर पर सम्पूर्ण पत्रकारिता जगत को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत में पत्रकारिता की एक गौरवशाली और ऐतिहासिक यात्रा रही है। उन्होंने कहा कि समाचारपत्रों ने सदैव राष्ट्रनिर्माण में अद्भुत भूमिका निभाई है और यह दिवस पत्रकारिता की निर्भीक चेतना का उत्सव है, जिसने भारत में सत्य, साहस और स्वतंत्र अभिव्यक्ति की नींव रखी।

स्वामी जी ने कहा कि भारतीय समाचारपत्र दिवस हमें उस युग की स्मृति कराता है, जब शब्दों की शक्ति से साम्राज्यों की नींव हिल जाया करती थी। 29 जनवरी 1780 को प्रकाशित भारत का पहला समाचारपत्र “हिक्की का बंगाल गजट” न केवल भारत, बल्कि एशिया का भी पहला मुद्रित समाचारपत्र था। समाचारपत्र समाज की पहली स्वतंत्र आवाज होते हैं, जो प्रश्न पूछने का साहस रखते हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय पत्रकारिता की जड़ें भय में नहीं, बल्कि धर्म, दायित्व और जनहित में निहित हैं। समाचारपत्र केवल सूचना का माध्यम नहीं रहे, बल्कि उन्होंने समाज को दिशा दी, जनमानस को जागृत किया और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया। महात्मा गांधी जी से लेकर लोकमान्य तिलक जी तक, स्वतंत्रता संग्राम में पत्रकारिता ने क्रांति का स्वरूप धारण किया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि आज के समय में, जब सूचनाओं की बाढ़ है और सोशल मीडिया के माध्यम से क्षणभर में खबरें फैल जाती हैं, तब समाचारपत्रों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। पत्रकारिता का उद्देश्य सनसनी फैलाना नहीं, बल्कि सत्य को प्रमाण, संतुलन और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करना है। नकारात्मक नैरेटिव से समाज को भ्रमित करना आसान है, किंतु सकारात्मक और समाधान-केंद्रित पत्रकारिता ही राष्ट्र को सशक्त बनाती है।
उन्होंने कहा कि भारतीय समाचारपत्र दिवस यह भी स्मरण कराता है कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है। इसकी शक्ति जितनी प्रभावशाली है, उतनी ही इसकी जिम्मेदारी भी है। समाचारपत्रों का कर्तव्य है कि वे भय, विभाजन और निराशा का माध्यम न बनें, बल्कि आशा, एकता और जागरूकता के वाहक बनें। सकारात्मक पत्रकारिता समाज में विश्वास का निर्माण करती है और नागरिकों को समाधान की दिशा में सोचने के लिए प्रेरित करती है।
स्वामी जी ने कहा कि आज आवश्यकता है कि पत्रकारिता केवल समस्याओं को उजागर करने तक सीमित न रहे, बल्कि उनके समाधान, प्रेरक उदाहरणों और सकारात्मक बदलावों को भी प्रमुखता से सामने लाए। जब समाचारपत्र अच्छे कार्यों, सामाजिक पहल, नवाचार और मानवीय संवेदनाओं को स्थान देते हैं, तब वे समाज को बेहतर बनाने की प्रेरणा देते हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय समाचारपत्र दिवस केवल पत्रकारों का ही नहीं, बल्कि हर उस नागरिक का उत्सव है जो सच पढ़ना, समझना और सही निर्णय लेना चाहता है। यह दिवस हमें यह सोचने का अवसर देता है कि हम कैसी पत्रकारिता चाहते हैं—डर फैलाने वाली या दिशा देने वाली, नकारात्मकता गढ़ने वाली या राष्ट्र को जोड़ने वाली।
अंत में स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि भारतीय समाचारपत्र अपनी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता और सकारात्मक सोच के साथ समाज की सेवा करते रहें, क्योंकि जब शब्द जिम्मेदारी के साथ लिखे जाते हैं, तो वे इतिहास रचते हैं।
