अंकिता मामला राजनीतिक है, क्योंकि सत्ता अपराधियों को बचा रही है: मोहित डिमरी
देहरादून। अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के सदस्य मोहित डिमरी ने कहा है कि अंकिता को न्याय दिलाने की लड़ाई को कमजोर करने के लिए सरकार जानबूझकर यह नैरेटिव गढ़ रही है कि इस मुद्दे पर राजनीति की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के प्रचार के माध्यम से आम जनता के बीच भ्रम पैदा किया जा रहा है कि क्या इस मामले में आवाज़ उठाना गलत है।

मोहित डिमरी ने स्पष्ट किया कि अंकिता का मामला कोई निजी या व्यक्तिगत मामला नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर राज्य, सत्ता, व्यवस्था और सरकार से जुड़ा हुआ राजनीतिक मुद्दा है। उन्होंने कहा कि जब सत्ता का दुरुपयोग अपराधियों को बचाने के लिए किया जाए, जब सरकार की पूरी ताक़त VIP को संरक्षण देने में लग जाए और जब सबूतों को बुलडोज़र से मिटाया जाए, तो ऐसा मामला अपने आप राजनीतिक बन जाता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि अंकिता प्रकरण में घटनास्थल को क्यों नष्ट किया गया और जांच एजेंसियों की प्राथमिकता न्याय के बजाय VIP को बचाना क्यों दिखाई दी। डिमरी के अनुसार, सरकार और प्रशासन की भूमिका ने पूरे मामले पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
डिमरी ने कहा कि आंदोलनकारियों पर “गलत राजनीति” करने के आरोप लगाए जा रहे हैं, जबकि वे न तो खनन की राजनीति कर रहे हैं, न शराब माफिया की, न ज़मीन लूट की और न ही भ्रष्टाचार की। उन्होंने कहा कि उनकी राजनीति बहनों को न्याय दिलाने और दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे भेजने की राजनीति है।
उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास गवाह है कि सबसे खतरनाक राजनीति चुप्पी की राजनीति होती है। यदि निर्भया के समय लोग चुप रहते और आज अंकिता के मामले में आवाज़ न उठाई जाती, तो हालात और भी भयावह होते।
महिलाओं की सुरक्षा को लेकर मोहित डिमरी ने कहा कि यह केवल सामाजिक या भावनात्मक मुद्दा नहीं, बल्कि पूरी तरह राजनीतिक मुद्दा है। उन्होंने सवाल उठाया कि पुलिस, प्रशासन और कानून-व्यवस्था किसके अधीन है और स्वयं उत्तर देते हुए कहा कि यह सरकार की जिम्मेदारी है। ऐसे में यदि बहन-बेटियाँ असुरक्षित हैं और आरोपियों को संरक्षण मिल रहा है, तो सवाल सरकार से ही पूछे जाएंगे।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, इसलिए इन सवालों के जवाब भी उसी को देने होंगे। डिमरी ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई इसलिए लड़ी जा रही है ताकि VIP भी जेल की सलाखों के पीछे जाएं, सबूत मिटाने वालों पर कार्रवाई हो और भविष्य में किसी अन्य बेटी के साथ ऐसा अन्याय न हो।
अंत में मोहित डिमरी ने कहा कि यदि अंकिता के साथ हुए अन्याय पर बोलना और दोषियों को जेल भेजने की लड़ाई राजनीति है, तो वे ऐसी राजनीति डंके की चोट पर करते रहेंगे।
