रूड़की में पंचम अखिल भारतीय शैक्षिक विमर्श एवं शिक्षक सम्मान समारोह सम्पन्न, 175 शिक्षक हुए सम्मानित
रूड़की/हरिद्वार। शैक्षिक नवाचार, मूल्य आधारित शिक्षा और शिक्षक सशक्तिकरण को केंद्र में रखते हुए रुड़की के शैफील्ड स्कूल में रविवार 11 जनवरी को पंचम अखिल भारतीय शैक्षिक विमर्श एवं शिक्षक सम्मान समारोह–2026 का भव्य आयोजन किया गया। डॉ. यादवेन्द्रनाथ मैमोरियल ट्रस्ट, रूड़की द्वारा संचालित “उद्घोष: शिक्षा का नया सवेरा” के तत्वावधान में आयोजित इस राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम ने शिक्षा जगत को नई दिशा और दृष्टि प्रदान की।

कार्यक्रम का मुख्य विषय “कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के युग में मूल्य आधारित शिक्षा एवं शिक्षकों की बदलती भूमिका” रहा। समारोह के मुख्य अतिथि दद्दन मिश्रा, पूर्व सांसद एवं पूर्व मंत्री (उत्तर प्रदेश सरकार) तथा वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष, श्रावस्ती ने कहा कि “शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। शिक्षक समाज की चेतना का शिल्पकार होता है।” उन्होंने शिक्षकों के सतत सम्मान को समय की आवश्यकता बताया।
इस अवसर पर देशभर से चयनित 175 शिक्षकों को ‘टीचर्स आइकन’, ‘शिक्षा श्री’ एवं ‘आइडियल टीचर्स अवार्ड’ से सम्मानित किया गया।
मुख्य वक्ता प्रो. डॉ. यशपाल सिंह ने कहा कि “कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में शिक्षक की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। तकनीक के साथ मानवीय संवेदना का समन्वय ही शिक्षा का भविष्य तय करेगा।”
विवेक यूनिवर्सिटी, बिजनौर के कुलपति प्रो. डॉ. एन.के. गुप्ता ने कहा कि “शिक्षा का उद्देश्य केवल सूचना देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में विवेक, मूल्य और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास करना है।”
श्रीमती मजीरा देवी विश्वविद्यालय, उत्तरकाशी के कुलपति प्रो. डॉ. भगवान नौटियाल ने भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीक के समन्वय को भविष्य की शिक्षा की सही दिशा बताया।
मैट्रीक्स स्किल्स यूनिवर्सिटी, सिक्किम के कुलपति प्रो. डॉ. अनूप प्रधान ने कहा कि “कौशल, चरित्र और करुणा—इन तीनों का संतुलन ही समग्र शिक्षा का आधार है।”
डॉ. हरिशंकर नौटियाल ने शिक्षक को समाज की आत्मा बताते हुए ऐसे आयोजनों को भावी पीढ़ी के लिए आवश्यक बताया।
टीएससीटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेकानंद आर्य ने कहा कि “शिक्षा तभी सार्थक है जब वह समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे।” वहीं डॉ. विपिन चौधरी ने शिक्षक सम्मान को शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण निर्माण का माध्यम बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए शैफील्ड स्कूल इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राहुल विश्नोई ने कहा कि “AI के युग में मानवीय मूल्यों को जीवित रखने की जिम्मेदारी शिक्षकों पर और बढ़ गई है।”
कार्यक्रम संयोजक संजय वत्स ने सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त करते हुए इसे शिक्षा के भविष्य के लिए सामूहिक चिंतन का सशक्त मंच बताया।
समारोह के दौरान आईएसबीएन अनुमोदित पुस्तक “शिक्षामेव जयते” का विधिवत विमोचन किया गया। कार्यक्रम का संचालन विनय प्रताप विनम्र एवं संजय वत्स ने संयुक्त रूप से किया।
इस अवसर पर विकास कुमार, डीके शर्मा, डॉ. नवीन खन्ना, आलोक, नितिन, सुमन चौहान, के.के. शर्मा, डॉ. अंजू शर्मा, संदीप शर्मा, अनु सिंहल, नरेंद्र शर्मा, प्रतिभा डोलका, सीमा राठी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
समारोह राष्ट्रगान एवं सामूहिक संकल्प के साथ भावपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ।
