गढवाल क्रिकेट टूर्नामेंटों की भरमार युवाओं का जोश चरम पर—खेती-पशुपालन और रोजगार पर उठे सवाल
द्वारीखाल। गढ़वाल क्षेत्र में इन दिनों गांव-गांव क्रिकेट टूर्नामेंटों की धूम मची हुई है। स्थानीय स्तर पर आयोजित हो रहे इन टूर्नामेंटों में बड़ी संख्या में युवा बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। खेल मैदानों में उत्साह, प्रतिस्पर्धा और मनोरंजन का माहौल तो है, लेकिन इसके साथ ही क्षेत्र की पारंपरिक आजीविका और रोजगार को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।

कभी खेती और पशुपालन के लिए पहचाना जाने वाला गढ़वाल आज तेजी से इन गतिविधियों से दूर होता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कृषि से आमदनी न के बराबर रह गई है और पशुपालन भी लागत व संसाधनों की कमी एवं जंगली जानवरों के बढ़ते आतंक के चलते घाटे का सौदा बन गया है। ऐसे में युवाओं के पास रोजगार के सीमित विकल्प ही बचे हैं।
स्थानीय लोगों का मानना है कि क्रिकेट टूर्नामेंट युवाओं को नकारात्मक गतिविधियों से दूर रखने का एक सकारात्मक माध्यम तो हैं, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है। युवाओं की ऊर्जा यदि रोजगार, स्वरोजगार और पारंपरिक आजीविका को मजबूत करने की दिशा में लगाई जाए, तो पलायन जैसी समस्याओं पर भी अंकुश लगाया जा सकता है।
क्षेत्रवासियों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि खेल गतिविधियों के साथ-साथ खेती, पशुपालन और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने के लिए ठोस नीतियां बनाई जाएं, ताकि गढ़वाल का युवा खेल के मैदान के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी मजबूत बन सके।
