उत्तराखण्ड विद्वत सभा द्वारा संदिग्ध त्योहारों के निवारण को लेकर ज्योतिषीय विद्वत गोष्ठी का आयोजन
देहरादून। उत्तराखण्ड विद्वत सभा (पंजीकृत) द्वारा महंत 108 श्री कृष्णानंद गिरी महाराज के सानिध्य में शनिवार 20 दिसम्बर 2025 को प्रातः 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक ज्योतिषीय विचार-विमर्श हेतु एक विद्वत गोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। गोष्ठी में संवत 2083 (सन् 2026–27) में पड़ने वाले संदिग्ध त्योहारों की तिथि-भ्रम की समस्या के निवारण पर गहन मंथन किया जाएगा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. रमेश चंद्र पांडेय, धर्माधिकारी, ज्योतिषपीठ शंकराचार्य ज्योर्तिमठ द्वारा की जाएगी। मुख्य अतिथि के रूप में आचार्य राधाकृष्ण थपलियाल, पूर्व धर्माधिकारी बद्रीनाथ धाम उपस्थित रहेंगे। विशिष्ट अतिथि राजेश बेंजवाल, संस्थापक तन्त्रकुलम तथा अतिविशिष्ट अतिथि डॉ. चंडी प्रसाद घिल्डियाल, सहायक निदेशक शिक्षा एवं संस्कृत शिक्षा, उत्तराखंड रहेंगे।
कार्यक्रम के आयोजकों में हर्षपति गोदियाल (अध्यक्ष विद्वत सभा), आचार्य सत्यप्रसाद सेमवाल (उपाध्यक्ष), आचार्य अजय डबराल (महासचिव), आचार्य आदित्यराम थपलियाल (कोषाध्यक्ष), आचार्य मुरलीधर सेमवाल (सह सचिव), आचार्य राजेश अमोली (सांस्कृतिक एवं संगठन सचिव), आचार्य विपिन चंद्र डोभाल (प्रवक्ता), आचार्य दीपक अमोली (लेखा निरीक्षक) सहित आचार्य आशीष खंकरियाल शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त कार्यकारिणी सदस्य के रूप में आचार्य मनमोहन लोहनी, परशुराम उनियाल, चंद्रशेखर जोशी, पवन बौड़ाई, कृष्णानंद नौडियाल, विकास भट्ट, विकास नौडियाल, कमलेश नैनवाल, कमलेश उनियाल, अभिषेक ममगाईं, राजेश्वर प्रसाद सेमवाल, कविंद्र सेमवाल एवं रामचंद्र ममगाईं सहभागिता करेंगे।
गोष्ठी में देश के वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य एवं पंचांगकर्ता भी अपने विचार रखेंगे, जिनमें आचार्य जगदंबा प्रसाद सती (पूर्व धर्माधिकारी बद्रीनाथ धाम), आचार्य भुवन चंद्र उनियाल (पूर्व धर्माधिकारी बद्रीनाथ धाम), पंडित विनोद बिजल्वाण (सिद्धिदात्री पंचांग), पंडित पयोधर डंगवाल (महीधर कीर्ति पंचांग), पंडित त्रिलोचन व्यास (वाणी भूषण पंचांग), डॉ. शंभू प्रसाद पांडेय, आचार्य द्वारिका कपरुवाण (ज्योतिषाचार्य, देवी दयाल संस्कृत विद्यालय, श्रीनगर गढ़वाल) एवं आचार्य नितेश बौड़ाई शामिल हैं।
विद्वत सभा द्वारा आयोजित यह गोष्ठी आगामी वर्षों में पर्व-त्योहारों की तिथियों को लेकर उत्पन्न होने वाले भ्रम को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास मानी जा रही है।
