कथित भू-कानून की खुली पोल, सतबूंगा मामला बना सवाल: लूशुन टोडरिया
देहरादून। उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के मूल निवास-भू-कानून प्रकोष्ठ के केंद्रीय अध्यक्ष लूशुन टोडरिया ने नैनीताल जनपद के सतबूंगा में भू-कानून के कथित उल्लंघन का मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार के दावों पर सवाल उठाए हैं।
टोडरिया ने कहा कि जिला मजिस्ट्रेट नैनीताल की अदालत द्वारा हरियाणा निवासी एक दंपति के नाम खरीदी गई अतिरिक्त भूमि को भू-कानून का उल्लंघन मानते हुए राज्य सरकार में निहित करने के आदेश यह दर्शाते हैं कि प्रदेश में ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं। उनका कहना है कि यदि शिकायत के बाद कार्रवाई संभव है, तो यह भी स्पष्ट है कि व्यवस्था में ऐसी खामियां हैं जिनके कारण नियमों के विपरीत भूमि की खरीद-फरोख्त हो रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार जिस भू-कानून को ऐतिहासिक और प्रभावी बताकर प्रचारित कर रही है, उसकी वास्तविक स्थिति ऐसे मामलों से उजागर हो रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि प्रारंभिक स्तर पर जांच और सत्यापन की व्यवस्था प्रभावी होती, तो नियमों के विरुद्ध भूमि खरीद की स्थिति ही उत्पन्न नहीं होती।
यूकेडी नेता ने कहा कि यह केवल एक मामला नहीं, बल्कि पूरे तंत्र की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न है। उन्होंने राज्य गठन के बाद से बाहरी व्यक्तियों द्वारा की गई सभी संदिग्ध भूमि खरीद की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने तथा जिन मामलों में भू-कानून या अन्य प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है, उनमें कठोर कार्रवाई की मांग की।
टोडरिया ने कहा कि उत्तराखंड की भूमि, जल, जंगल और संसाधनों की रक्षा केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि पारदर्शी और प्रभावी कानून के क्रियान्वयन से ही संभव है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता को ऐसा भू-कानून चाहिए जो वास्तव में राज्य के हितों और मूल निवासियों के अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित कर सके।
