पौड़ी

डायट में शिक्षा सुधार की नई दिशा, गुणवत्ता, डिजिटल शिक्षण और स्थानीय भाषा पर जोर

पौड़ी। जिलाधिकारी ने बुधवार को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), पौड़ी में आयोजित कार्यक्रम सलाहकार समिति की बैठक में शिक्षक प्रशिक्षण, शैक्षिक नवाचार, अवसंरचना विकास और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन की व्यापक समीक्षा की। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, दक्ष शिक्षक और आधुनिक संसाधन बेहतर शिक्षा व्यवस्था की आधारशिला हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रमों का वास्तविक प्रभाव विद्यालयों की कक्षाओं में दिखाई देना चाहिए।

बैठक के प्रारंभ में डायट के प्राचार्य स्वराज सिंह तोमर, संस्थान के शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं ने जिलाधिकारी का स्वागत किया। प्राचार्य ने वर्ष 2025-26 में संचालित विभिन्न कार्यक्रमों, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत किए जा रहे नवाचारों, समग्र शिक्षा अभियान, शिक्षक शिक्षा, मानव संसाधन, आधारभूत संरचना, प्रशिक्षण गतिविधियों और विद्यालयों में संचालित शैक्षिक कार्यक्रमों की जानकारी दी।

जिलाधिकारी ने विद्यालयों में संचालित विदेशी भाषा पाठ्यक्रमों की समीक्षा करते हुए कहा कि किसी नई भाषा को पाठ्यक्रम में शामिल करने से पहले उसकी रोजगारपरक उपयोगिता, वैश्विक अवसरों में प्रासंगिकता, विद्यार्थियों की रुचि और शिक्षकों के अनुभवों का समग्र मूल्यांकन किया जाए। उन्होंने वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप अन्य उपयोगी विदेशी भाषाओं को शामिल किए जाने की संभावनाओं का अध्ययन कर प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।

बैठक में बाल मेला, आनंदम, कौशलम, अबेकस, बेसिक कंप्यूटर, पायथन, सी++, डिजिटल साक्षरता, साइबर सुरक्षा, जैव विविधता संवर्धन, बालसखा कार्यक्रम और सेवारत शिक्षक प्रशिक्षण सहित विभिन्न शैक्षिक एवं नवाचार आधारित कार्यक्रमों की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने कहा कि शिक्षक प्रशिक्षण केवल औपचारिकता नहीं होना चाहिए। प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षकों का नियमित फॉलोअप किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रशिक्षण के दौरान सीखी गई तकनीकों एवं शिक्षण विधियों का प्रभाव कक्षा-कक्षों में भी दिखाई दे।

जिलाधिकारी ने स्थानीय भाषा एवं संस्कृति के संरक्षण को शिक्षा का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए निर्देश दिए कि ‘बस्तारहित दिवस’ के अवसर पर विद्यार्थियों को गढ़वाली भाषा में भी शिक्षण कराया जाए। उन्होंने कहा कि मातृभाषा में शिक्षा बच्चों के बौद्धिक एवं भावनात्मक विकास को मजबूत बनाती है। डायट द्वारा तैयार गढ़वाली भाषा की पुस्तकों के मुद्रण संबंधी प्रस्ताव शीघ्र तैयार कर उन्हें प्राथमिक विद्यालयों तक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। उन्होंने पुस्तकों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने को कहा, ताकि विद्यार्थियों में मातृभाषा के प्रति रुचि विकसित हो सके।

बैठक में नशामुक्ति अभियान के अंतर्गत विद्यालयों में वितरित ‘अनमोल जीवन’ पुस्तिका की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने जिला शिक्षाधिकारी को इसके प्रभाव का मूल्यांकन करने तथा विद्यार्थियों में नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए नियमित गतिविधियां आयोजित करने के निर्देश दिए। बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए विद्यार्थियों को ऑनलाइन सुरक्षा, साइबर फ्रॉड से बचाव, सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग और डिजिटल नैतिकता की जानकारी देने के लिए सरल एवं उपयोगी साइबर सुरक्षा पुस्तिका तैयार कराने को भी कहा।

जिलाधिकारी ने जनपद में विकसित किए जा रहे मॉडल विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक संसाधन और नवाचार आधारित शिक्षण प्रणाली विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने डायट को इन विद्यालयों की नियमित निगरानी, शैक्षणिक सहयोग और समन्वित समीक्षा की जिम्मेदारी प्रभावी ढंग से निभाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मॉडल विद्यालय अन्य विद्यालयों के लिए प्रेरणा केंद्र बनने चाहिए। जिन विद्यालयों में स्मार्ट क्लास की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां तत्काल प्रस्ताव तैयार कर उपलब्ध कराने को कहा।

अवसंरचना विकास की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने कार्यदायी संस्थाओं को सभी निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा में गुणवत्तापूर्वक पूर्ण करने के निर्देश दिए। मंडी परिषद द्वारा निर्माण कार्यों में हो रही धीमी प्रगति पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए लंबित आपत्तियों का शीघ्र निस्तारण करने और कार्यों में तेजी लाकर निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए।

बैठक के उपरांत जिलाधिकारी ने डायट परिसर का विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने लेखा अनुभाग, अभिलेख एवं पंजिकाओं, बायोमेट्रिक उपस्थिति, विज्ञान प्रयोगशाला, कंप्यूटर लैब, प्रशासनिक भवन, पुस्तकालय एवं अन्य अनुभागों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। मुख्य भवन में सीलन की समस्या पर उन्होंने पेयजल निगम को तत्काल स्थलीय निरीक्षण कर तकनीकी परीक्षण के बाद विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

महिला शौचालय की खराब स्थिति एवं पेयजल व्यवस्था पर भी जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त करते हुए तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने 100 बेड के छात्रावास का निरीक्षण कर स्वच्छता, पेयजल, भोजनालय, सुरक्षा व्यवस्था और रिटेनिंग वॉल की स्थिति देखी। प्रशिक्षणार्थी शिक्षकों के आवासों में फर्नीचर, शयन व्यवस्था, शौचालय, पेयजल सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने संस्थान के शिक्षकों, कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं से संवाद कर प्रशिक्षण व्यवस्था, पाठ्यक्रम, परीक्षा प्रणाली, डिजिटल शिक्षण, शोध गतिविधियों और संस्थान की कार्यप्रणाली से जुड़े सुझाव भी प्राप्त किए। उन्होंने कहा कि बदलते समय के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था में तकनीक, नवाचार, स्थानीय आवश्यकताओं एवं भारतीय ज्ञान परंपरा का संतुलित समावेश आवश्यक है। शिक्षकों द्वारा निरंतर सीखने और नवाचार अपनाने से विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार किया जा सकता है।

इस अवसर पर मुख्य शिक्षाधिकारी अत्रेश सयाना, जिला शिक्षाधिकारी अंशुल बिष्ट, खंड शिक्षाधिकारी मास्टर आदर्श, पेयजल निगम, मंडी समिति, अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के प्रतिनिधि तथा डायट के शिक्षक, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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