पौड़ी

परमार्थ निकेतन में सीडीएस जनरल बिपिन रावत को पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि; बोधि दिवस पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने दिया वैश्विक शांति का संदेश

ऋषिकेश। देश के प्रथम चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, शहीद जनरल बिपिन रावत की पुण्यतिथि पर परमार्थ निकेतन में उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया गया। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने जनरल रावत को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि राष्ट्ररक्षा के प्रति उनका अदम्य साहस, निष्ठा और नेतृत्व भारत माता के इतिहास का गौरवपूर्ण अध्याय है। उन्होंने कहा कि जनरल रावत का राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत जीवन आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।

इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने बोधि दिवस पर भी विशेष संदेश देते हुए कहा कि यह दिन मानव इतिहास की उस महान अनुभूति का प्रतीक है, जब भगवान बुद्ध ने बोधगया में ‘बोधि’ अर्थात् परम ज्ञान प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि बुद्ध का संदेश—अहिंसा, शांति, करुणा और मध्यम मार्ग—आज भी मानवता के लिए पथप्रदर्शक है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि वर्तमान समय में समाज हिंसा, तनाव, भेदभाव, पर्यावरण संकट और मानसिक अशांति जैसी कई चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में भगवान बुद्ध का संदेश “अप्प दीपो भव—स्वयं अपना दीपक बनो” पहले से अधिक प्रासंगिक हो गया है। बोधि दिवस हमें आंतरिक जागरण, करुणा और आत्मविकास की ओर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध का दर्शन केवल धार्मिक उपदेश नहीं, बल्कि व्यावहारिक जीवन-पथ है, जो मानवता को जोड़ता है और मन को शांत करता है। बोधगया की पवित्र भूमि आज भी विश्व भर के साधकों के लिए ध्यान और आत्मचिंतन का केंद्र बनी हुई है।

स्वामी जी ने कहा कि इस पावन अवसर पर हर व्यक्ति को अपने जीवन पर चिंतन करते हुए यह संकल्प लेना चाहिए कि वह क्रोध, लोभ और भ्रम को त्यागकर अपने भीतर करुणा, धैर्य और समझ की भावना को बढ़ाए। यही मार्ग मानवता को वैश्विक सद्भाव और शांति की दिशा में आगे ले जाता है।

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