पौड़ी

कुण्ड ग्राम में सहकारिता आधारित सामूहिक खेती बना ग्रामीण विकास का प्रेरक मॉडल

पौड़ी। विकासखण्ड कल्जीखाल के बनेखखाल क्षेत्र के ग्राम कुण्ड ने सहकारिता के माध्यम से सामूहिक कृषि का एक प्रेरणादायक मॉडल प्रस्तुत किया है। यहाँ की साधन सहकारी समितियों ने मिलकर ‘वीर माधो सिंह भण्डारी संयुक्त सहकारी खेती’ की स्थापना की, जिसके तहत 133.14 नाली वर्षों से बंजर पड़ी भूमि को पुनः कृषि योग्य बनाकर एक जीवंत कृषि क्लस्टर में परिवर्तित किया गया है।

इस पहल में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं, प्रगतिशील किसानों और सहकारी समितियों के सचिवों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके प्रयासों से यह क्षेत्र अब फूलों और सब्जियों की सुगंध से महक रहा है।

परियोजना से 22 कृषक सक्रिय रूप से जुड़े हैं। फ्लोरीकल्चर के तहत ग्लेडियोलस, गुलदाउदी और डेज़ी जैसे फूलों की सफल खेती हो रही है। साथ ही पॉलीहाउस आधारित उच्च गुणवत्ता वाली सब्जियों का उत्पादन किसानों के लिए नियमित आय का मजबूत स्रोत बन रहा है।

सहकारिता विभाग ने राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना के अंतर्गत ₹500 प्रति नाली की दर से ₹66,572.88 की धनराशि की मांग परियोजना कार्यालय को भेजी है।

इस योजना की मुख्य विशेषता इसका सामूहिक स्वरूप है। वीर माधो सिंह भण्डारी के सम्मान में नामित यह मॉडल ग्रामीण आजीविका बढ़ाने, कृषि क्लस्टर विकसित करने, बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने और पहाड़ों में रिवर्स माइग्रेशन को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है। साथ ही यह ग्रामीण पर्यटन की संभावनाओं को भी बढ़ा रहा है।

चयनित क्लस्टर के लिए सहकारी समिति बनेखखाल द्वारा 20 कृषकों से 14 वर्ष के लिए 133.14 नाली भूमि का अनुबंध किया गया है। परियोजना संचालन हेतु परियोजना कार्यालय द्वारा ₹13,56,000 की धनराशि स्वीकृत की गई है, जिसमें से ₹11,50,000 का प्रभावी उपयोग हो चुका है।

अक्टूबर माह से आरंभ फूल कटिंग अभियान में गुलदाउदी के 1,866 और ग्लेडियोलस के 2,743 बंच की कटिंग कर दिल्ली व देहरादून बाजारों में बिक्री की गई, जिससे समिति को ₹3,96,000 की आय प्राप्त हुई है। कटिंग कार्य निरंतर जारी है।

जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने इस उत्कृष्ट कार्य की प्रशंसा करते हुए ग्रामीणों को प्रोत्साहित किया है। ग्राम कुण्ड का यह मॉडल सिद्ध करता है कि सहकारिता की भावना से एकजुट होकर कार्य किया जाए तो बंजर भूमि भी समृद्धि और आत्मनिर्भरता का आधार बन सकती है।

यह पहल नारी शक्ति, सामूहिक प्रयास, नवाचार और ग्रामीण विकास का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है, जिसे प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी अपनाया जा सकता है।

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