जंगली जानवरों की बढ़ती सक्रियता पर जिला प्रशासन हुआ सतर्क — प्रभावित क्षेत्रों में गश्त, सर्वे और सुरक्षा उपायों को मिले नए निर्देश
पौड़ी। जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में गुलदार, बाघ एवं अन्य जंगली जानवरों की बढ़ती सक्रियता को देखते हुए बुधवार को जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया की अध्यक्षता में वन विभाग, समस्त उपजिलाधिकारी एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि घटनाओं की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में वन विभाग नियमित गश्त सुनिश्चित करे तथा प्रभावित स्थानों पर सुरक्षा उपायों को और अधिक प्रभावी बनाया जाए।

बैठक में गुलदार/बाघ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति, जंगली जानवरों के हमलों से पीड़ितों को प्रदत्त मुआवजा, जागरूकता कार्यक्रमों की प्रगति तथा पिछले तीन वर्षों के आँकड़ों पर विस्तृत चर्चा हुई।
डीएफओ गढ़वाल अभिमन्यु सिंह द्वारा प्रस्तुत प्रेजेंटेशन की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने घायल एवं मृतक आश्रितों को दिए गए मुआवजे की स्थिति की जानकारी ली।
गुलदार के हमलों को कम करने हेतु जिलाधिकारी ने एसडीओ को ऐसे स्थान चिन्हित करने के निर्देश दिए जहां जोखिम अधिक रहता है। उन्होंने पंचायती राज विभाग को तेजी से कार्यवाही के लिए बुशकटर क्रय करने के निर्देश भी दिए।
साथ ही सिविल सोयम क्षेत्र में विस्तृत सर्वे कराने और हॉटस्पॉट क्षेत्रों को मैप में चिन्हित कर स्थानीय स्तर पर साझा करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने उपकरणों की उपलब्धता की समीक्षा की तथा नाइट विज़न ड्रोन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने एनिमल टैगिंग, प्रचार-प्रसार और सर्वे में शोधार्थियों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया।
कृषि क्षेत्रों में बंदरों से होने वाली क्षति पर जिलाधिकारी ने कृषि विभाग को वन विभाग के साथ समन्वय कर पायलट प्रोजेक्ट संचालित करने का निर्देश दिया तथा 10 दिनों में रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा।
उन्होंने डीएफओ से गुलदार, बाघ और भालू के हमलों को कम करने हेतु किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत जानकारी ली और प्रभावित क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।
जिलाधिकारी ने पुलिस विभाग को बेहतर निशानेबाजी करने वाले पुलिसकर्मियों की सूची उपलब्ध कराने तथा वन विभाग को सक्षम कार्मिक चिन्हित करने को कहा, ताकि आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने पीआरडी जवानों की गश्त बढ़ाने के लिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए और बताया कि वन्यजीव सक्रियता वाले पहले 20 गांवों को चिन्हित कर किसी विशेषज्ञ संस्था से सर्वे कराया जाएगा।
बैठक में डीएफओ लैंसडाउन जीवन मोहन दगाड़े ने फॉक्स लाइट, सोलर लाइट, बायो-फेंसिंग आदि के माध्यम से वन्यजीवों के बचाव उपायों की जानकारी दी।
डीएफओ कालागढ़ तरुण श्रीधर ने टास्क फोर्स गठन एवं बायोचार द्वारा झाड़ियों के समाधान की आवश्यकता पर बल दिया। इन बिंदुओं पर संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने प्रभावित गांवों का माइक्रोप्लान तैयार करने तथा पायलट प्रोजेक्ट पर कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। साथ ही महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए चारा–पत्ती लेने जाते समय रिफ्लेक्टिंग जैकेट पहनकर समूह में जाने की सलाह दी।
बैठक में बताया गया कि गुलदार, भालू सहित जंगली जानवरों के हमलों से बचाव हेतु लगातार प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। वन कर्मियों को हथियार प्रशिक्षण दिया जा रहा है तथा विद्यालयों में विद्यार्थियों को भी जागरूक किया जा रहा है।
बैठक में डीएफओ सिविल एवं सोयम पवन नेगी, संयुक्त मजिस्ट्रेट दीक्षिता जोशी, सीओ पुलिस तुषार बोरा, एसडीओ वन लक्की शाह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
— सूचना एवं लोक संपर्क विभाग, पौड़ी गढ़वाल
