उत्तराखंडहरिद्वार

उत्तराखंड ने खोया अपना संघर्षशील योद्धा

*राज्य आंदोलन के अग्रणी नेता दिवाकर भट्ट नहीं रहे*

हरिद्वार। उत्तराखंड राज्य आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल और पूर्व कैबिनेट मंत्री दिवाकर भट्ट का सोमवार शाम लगभग 4:30 बजे निधन हो गया। वे पिछले कई दिनों से बीमार चल रहे थे और महंत इंदिरेश अस्पताल, देहरादून में उपचाराधीन थे। स्थिति में सुधार न होने पर उन्हें हरिद्वार स्थित उनके आवास पर लाया गया, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से पूरे उत्तराखंड में शोक की लहर है।

दिवाकर भट्ट राज्य आंदोलन के दौरान अपने तेजतर्रार नेतृत्व, संघर्षशील व्यक्तित्व और बेबाक शैली के लिए जाने जाते थे। लंबे आंदोलनकाल में वे कई मोर्चों पर न केवल सक्रिय रहे, बल्कि नेतृत्व की अग्रिम पंक्ति में भी उपस्थित रहे।

दिवाकर भट्ट उन नेता-आंदोलनकारियों में थे जिन्होंने उत्तराखंड राज्य की मांग को जन-जन तक पहुंचाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

लखनऊ, दिल्ली और उत्तराखंड के तमाम हिस्सों में धरना-प्रदर्शनों, गिरफ्तारियों और सत्याग्रह आंदोलनों का नेतृत्व किया।

उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) के मंच से राज्य निर्माण के लिए प्रचंड जनसमर्थन तैयार किया।

आंदोलन की रणनीति, संगठन मजबूती और व्यापक जनचेतना फैलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

राज्य निर्माण के बाद दिवाकर भट्ट ने सक्रिय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय अध्यक्ष रहे।

उन्होंने राज्य सरकार में खाद्य आपूर्ति एवं राजस्वमंत्री के रूप में विभिन्न विभागों का संचालन किया।

उनका राजनीतिक जीवन सदैव सरलता, जनसरोकार और आंदोलनकारी विचारधारा से परिभाषित रहा।

करीब 10–12 दिनों से उनका स्वास्थ्य लगातार गिर रहा था। महंत इंदिरेश अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में इलाज चल रहा था। स्वास्थ्य में सुधार न आने पर परिजन उन्हें हरिद्वार स्थित उनके निवास पर ले आए, जहां आज शाम उनका स्वर्गवास हो गया।

दिवाकर भट्ट के निधन की सूचना मिलते ही आंदोलनकारी संगठनों, राजनीतिक दलों और आम नागरिकों ने गहरा दुख व्यक्त किया।

कई नेताओं ने कहा कि “दिवाकर भट्ट का निधन उत्तराखंड के इतिहास का एक बड़ा क्षणिक-रिक्ति है, जिसे भरा नहीं जा सकता।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *