नारी निकेतन, पौड़ी गढ़वाल: आश्रय से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता सुरक्षित घर
पौड़ी। पौड़ी गढ़वाल की शांत वादियों के बीच स्थित राजकीय महिला कल्याण एवं पुनर्वास केंद्र (नारी निकेतन) उन बालिकाओं के लिए सुरक्षित आश्रय बनकर उभरा है, जिन्होंने जीवन में कठिन परिस्थितियों का सामना किया है। वर्ष 1984-85 में कोटद्वार में स्थापित यह संस्थान पीड़ित, परित्यक्त एवं सामाजिक शोषण से गुज़री बालिकाओं को सुरक्षा, शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और सम्मानपूर्ण जीवन प्रदान करने के उद्देश्य से सतत कार्यरत है।

सरकार की प्राथमिकता से बदल रहा संस्थान का स्वरूप
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सशक्त नेतृत्व में महिला सुरक्षा व सशक्तिकरण को प्राथमिकता दिए जाने का सीधा प्रभाव नारी निकेतन की व्यवस्था पर दिखाई दे रहा है। महिला सुरक्षा, कौशल विकास तथा पुनर्वास कार्यक्रमों को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार के प्रयासों से संस्थान की सेवाएँ और कार्यप्रणाली और अधिक प्रभावी हुई हैं।
अधीक्षिका विजयलक्ष्मी भट्ट का संवेदनशील नेतृत्व
संस्थान की अधीक्षिका विजयलक्ष्मी भट्ट के नेतृत्व में नारी निकेतन बालिकाओं के लिए केवल आश्रय नहीं, बल्कि नए जीवन की दिशा प्रदान करने वाला घर बन गया है। वे प्रत्येक बालिका की मनोवैज्ञानिक स्थिति, शिक्षा, कौशल व रुचियों को समझकर उनके सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं।
13 बालिकाएँ लाभान्वित, विविध कौशल प्रशिक्षण जारी
जिला परिवीक्षा अधिकारी अरविंद कुमार ने बताया कि वर्तमान में केंद्र में 13 बालिकाएँ निवासरत हैं जिन्हें विद्यालयी शिक्षा के साथ स्टेनो, कंप्यूटर, ब्यूटीशियन, खेल प्रशिक्षण एवं होटल मैनेजमेंट जैसे कौशल विकास कोर्स कराए जा रहे हैं।
04 बालिकाएँ : होटल मैनेजमेंट
04 बालिकाएँ : ब्यूटीशियन कोर्स
01 बालिका : स्टेनो
01 बालिका : स्पोर्ट्स ट्रेनिंग
03 बालिकाएँ : बेसिक कंप्यूटर कोर्स
उन्होंने बताया कि पोषणयुक्त भोजन, मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग, यूनिफॉर्म, अध्ययन सामग्री और आत्मनिर्भरता बढ़ाने वाले प्रशिक्षण उनकी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा हैं। संस्थान के प्रयासों से हाल ही में एक बालिका का कैम्स कंपनी, हरिद्वार में सुरक्षा कर्मी के रूप में चयन होना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
सुव्यवस्थित भवन व सुरक्षा व्यवस्थाएँ
दो मंजिला भवन में निवास कक्ष, हॉल, डाइनिंग हॉल, किचन और स्वच्छ शौचालय उपलब्ध हैं। रात्रिकालीन सुरक्षा हेतु स्ट्रीट लाइट व इन्वर्टर की व्यवस्था भी की गई है। जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया के निर्देशन में बालिकाओं के विद्यालय, स्वास्थ्य व अन्य आपातकालीन आवश्यकताओं हेतु वाहन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी है।
संरक्षण के साथ पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य
नारी निकेतन न केवल संरक्षण का केंद्र है बल्कि राज्य सरकार की अनाथ आरक्षण नीति के तहत कई महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने में भी सहायक रहा है। पिछले दो वर्षों में पौड़ी जिले से 250 से अधिक महिलाओं व बालिकाओं का संरक्षण एवं अध्ययन पूरा कराया गया है।
बाल अपराध, बाल विवाह एवं बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता हेतु 600 से अधिक कार्यक्रमों के माध्यम से 18,000 से अधिक बच्चों को जागरूक किया गया है।
राज्य के विज़न का प्रेरक उदाहरण
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार “सुरक्षित, शिक्षित और सशक्त बालिका” के विज़न पर कार्य कर रही है। नारी निकेतन, पौड़ी गढ़वाल इस विज़न का एक जीवंत उदाहरण बन चुका है, जहाँ बालिकाएँ संरक्षण से आगे बढ़कर आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक जीवन की ओर अग्रसर हो रही हैं।
नारी निकेतन आज वह स्थान बन गया है जहाँ संघर्ष अवसर में, अवसर आत्मविश्वास में और आत्मविश्वास सफलता में बदल रहा है—और यही इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि है।
