ऋषिकेश

रूप चतुर्दशी पर कैलाश खेर का परमार्थ निकेतन आगमन, भजनों की गूंज से गंगा तट हुआ आलोकित

ऋषिकेश। रूप चतुर्दशी के पावन अवसर पर विख्यात आध्यात्मिक गायक पद्मश्री कैलाश खेर का परमार्थ निकेतन आगमन हुआ। उन्होंने परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया।

कैलाश खेर की जादुई आवाज़ ने गंगा तट को भक्ति और भावनाओं से सराबोर कर दिया। उनके भजनों और आध्यात्मिक गीतों की गूंज से संपूर्ण परमार्थ परिसर श्रद्धा और आनंद से भर उठा। वहां उपस्थित साधक और श्रद्धालु इस आध्यात्मिक माहौल में भावविभोर हो उठे। इस अवसर पर विश्व शांति और राष्ट्र की समृद्धि के लिए विशेष प्रार्थनाएँ की गईं।

रूप चतुर्दशी का पर्व परमार्थ निकेतन में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। इस पावन दिन पर मंदिर को दीपों से सजाया गया तथा विश्व शांति यज्ञ के माध्यम से आत्मिक शुद्धि, सुख-समृद्धि और समाज कल्याण की कामना की गई।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि रूप चतुर्दशी और दीपावली केवल बाहरी उत्सव नहीं, बल्कि आंतरिक जागृति, ज्ञान और दिव्यता के प्रतीक हैं। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि इस दीपावली को “दीपों वाली, स्वदेशी वाली दीपावली” के रूप में मनाएँ।

उन्होंने कहा, “हजारों दीप जलाना अच्छा है, लेकिन असली महत्व तब है जब हम सबके जीवन में प्रकाश फैलाने का प्रयास करें। दीपावली केवल बाहरी दीपों का नहीं, बल्कि आंतरिक प्रकाश, नैतिकता, सांस्कृतिक गौरव और सेवा का उत्सव है।”

आध्यात्मिक गायक कैलाश खेर ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनके जीवन और संगीत में आध्यात्म का विशेष स्थान है। उन्होंने कहा कि परमार्थ गंगा तट पर भजन गाना उनके लिए दिव्य और आत्मिक अनुभव है। “पूज्य स्वामी जी के सान्निध्य में दीपावली मनाना मेरे लिए परम सौभाग्य है,” उन्होंने कहा।

साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि नरक चतुर्दशी अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “जीवन का अंधकार चाहे जितना गहरा हो, एक दीपक की रोशनी उसे मिटा सकती है। यह प्रकाश केवल बाहरी नहीं, बल्कि हमारे मन और आत्मा के भीतर का भी प्रतीक है।”

शाम को परमार्थ गंगा तट दीपों की झिलमिलाहट और कैलाश खेर के भजनों से आलोकित हो उठा। गंगा की लहरों पर तैरते दीप मानो स्वर्गिक दृश्य प्रस्तुत कर रहे थे। श्रद्धालुओं ने इस अद्भुत अनुभव को आत्मसात किया।

कार्यक्रम के अंत में स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कैलाश खेर को रूद्राक्ष का पौधा भेंट कर ग्रीन, क्लीन और प्रदूषण मुक्त दीपावली मनाने का संदेश दिया। इस अवसर पर भारत सहित विश्व के विभिन्न देशों से आए पर्यटक और श्रद्धालु भी परमार्थ निकेतन की गंगा आरती में सम्मिलित हुए।

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