दीपावली 20 को या 21 को? उत्तराखंड के विद्वानों ने दी अंतिम राय – 21 अक्टूबर शुभ मुहूर्त घोषित!
देहरादून। देश में सनातन धर्म के प्रमुख त्योहारों को लेकर अक्सर विरोधाभास और भ्रम की स्थिति देखने को मिलती है। इस बार दीपावली पर्व को लेकर भी विद्वानों के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं। कुछ पंडित और ज्योतिषाचार्य दीपावली का पर्व 20 अक्टूबर को मना रहे हैं, जबकि कुछ 21 अक्टूबर को मान रहे हैं।

पंचांग और ग्रह-नक्षत्रों की गणना में सूक्ष्म अंतर के चलते यह भ्रम उत्पन्न हुआ है। कई स्थानों पर अमावस्या तिथि के प्रारंभ और समापन समय में अंतर होने से लोगों में दुविधा बनी हुई है कि लक्ष्मी पूजन कब किया जाए।
धर्माचार्यों का मानना है कि ऐसे विवाद या भ्रम से बचने के लिए त्योहारों की तिथियों पर चर्चा पंचांग प्रकाशित होते ही शुरू हो जानी चाहिए, ताकि समय रहते एकमत निर्णय लेकर जनमानस को स्पष्ट जानकारी दी जा सके।
इसी क्रम में उत्तराखंड के प्रसिद्ध “वाणी भूषण पंचांग” ने दीपावली का पर्व 21 अक्टूबर 2025 को मनाने का निर्णय दिया है। साथ ही, उत्तराखंड के प्रसिद्ध कथा वाचक आचार्य शिवप्रसाद ममगांई ‘ज्योतिषपीठ व्यास’, संरक्षक उत्तराखंड विद्वत सभा, ने भी 21 अक्टूबर को दीपावली मनाने का शास्त्रीय प्रमाण प्रस्तुत किया है।
आचार्य ममगांई ने पुरुषार्थ चिंतामणि ग्रंथ का हवाला देते हुए कहा—
“पूर्वत्रैव व्याप्तरिति पक्षे परत्र यामात्रयाधिक व्याप्ति दर्शे दशमीपेक्षतया प्रतिपत्वृद्धि सत्त्वे लक्ष्मीपूजादिकमपि परत्रै वेत्युक्तम्।
एतन्मते उभयत्र प्रदोष व्याप्ति पक्षेपि परत्र दर्शस्य सार्धयाम त्रयाधिक व्याप्ति त्वात्परेव युक्तेतिभाति।”
उन्होंने बताया कि 21 अक्टूबर 2025 को प्रदोषकाल में साकल्यापादित अमावस्या विद्यमान रहेगी। धर्मशास्त्रों के अनुसार यदि किसी तिथि का एक पल भी कर्मकाल में आता है, तो वह तिथि पूर्ण रूप से व्रत, पूजा और अनुष्ठान के लिए योग्य मानी जाती है। अतः 21 अक्टूबर को लक्ष्मी पूजन करना पूर्णतः शास्त्रसम्मत है।
आचार्य ममगांई के अनुसार, सूर्यास्त के आधा घंटा पहले से लेकर सूर्यास्त के बाद दो घंटे 24 मिनट की अवधि को प्रदोषकाल माना जाएगा। इस कालखंड में लक्ष्मी पूजन करना सर्वाधिक शुभ और फलदायक रहेगा।
धार्मिक विद्वान पं. रामशरण जोशी का कहना है, “पंचांग निर्माण की प्रक्रिया वैज्ञानिक और खगोलीय गणना पर आधारित होती है, किंतु सूक्ष्म अंतर कई बार भ्रम पैदा कर देता है। अतः एक समन्वित पंचांग समिति द्वारा तिथियों की पूर्व घोषणा होनी चाहिए।”
हर साल दीपावली, होली, जन्माष्टमी जैसे पर्वों की तिथि को लेकर उत्पन्न भ्रम यह सवाल खड़ा करता है कि क्या अब समय आ गया है जब एकीकृत राष्ट्रीय पंचांग समिति बनाकर त्योहारों की तिथियां पहले से तय की जाएं, ताकि सनातन परंपरा के पर्व पूरे एकमत, श्रद्धा और शास्त्रीयता के साथ मनाए जा सकें।
