अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 के उपलक्ष्य में श्रीनगर में जनपद स्तरीय सहकारिता मेले का शुभारंभ
विधानसभा अध्यक्षा ऋतु भूषण खंडूरी और कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत रहे मुख्य अतिथि
श्रीनगर (पौड़ी गढ़वाल)। अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 के अवसर पर मंगलवार को आवास विकास मैदान, श्रीनगर में आयोजित जनपद स्तरीय सहकारिता मेले का शुभारंभ विधानसभा अध्यक्षा ऋतु भूषण खंडूरी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत भी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

मुख्य अतिथि ऋतु भूषण खंडूरी ने मेले के पहले दिन लगाये गये विभिन्न विभागीय स्टॉल्स का निरीक्षण किया और उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि सहकारिता केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और ग्रामीण विकास की आत्मा है।
उन्होंने कहा कि आज जब महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आगे बढ़ रही हैं, तो यह केवल परिवार ही नहीं बल्कि पूरे समाज की उन्नति का संकेत है। उन्होंने कहा कि ऐसे मेलों से महिला समूहों को अपने उत्पादों के लिए सही मूल्य और बाजार मिलता है, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त होकर आत्मनिर्भरता की राह दिखाती हैं।
कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने अपने संबोधन में कहा कि सहकारिता आंदोलन ग्रामीण विकास की रीढ़ है। राज्य सरकार सहकारिता को केवल योजना तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि इसे रोजगार, उद्यमिता और ग्रामीण समृद्धि का व्यापक आंदोलन बना रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक गांव को सहकारिता से जोड़ा जाए, ताकि स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुँचाने का मार्ग प्रशस्त हो सके।
डॉ. रावत ने बताया कि वर्तमान में 30 लाख लोग सहकारिता से जुड़े हैं, और सरकार का लक्ष्य है कि इसे 50 लाख तक विस्तारित किया जाए।
इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्षा और कैबिनेट मंत्री ने पशुपालन के क्षेत्र में कार्यरत तीन स्वयं सहायता समूहों — धारी देवी समूह (पोखरी), सुखरो देवी समूह (सुखरो) और निर्मल समूह (पदमपुर सुखरो) — को 5-5 लाख रुपये के चेक प्रदान किए।
इसके साथ ही पशुपालन एवं मुर्गीपालन कार्य करने वाले लाभार्थियों अनूप सिंह, अर्जुन सिंह, मानवेन्द्र सिंह और जयपाल सिंह को 1.50-1.50 लाख रुपये, जबकि प्रेमलाल, राजेन्द्र सिंह और सुशिला देवी को 1.60 लाख रुपये के चेक वितरित किए गए।
मुख्य विकास अधिकारी गिरीश गुणवन्त ने कहा कि सहकारिता मेले जैसे आयोजन स्थानीय उत्पादों को पहचान और स्थायी बाजार उपलब्ध कराते हैं। उन्होंने बताया कि जनपद के महिला एवं युवक समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे जैविक उत्पाद, हस्तशिल्प, दुग्ध, पशुपालन और कृषि आधारित वस्तुएं ग्रामीणों की आय बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय रोजगार सृजन का बड़ा माध्यम बन रही हैं।
मेले में कृषि, उद्यान, मत्स्य, डेयरी, पशुपालन, उरेडा, उद्योग, पर्यटन, समाज कल्याण, स्वास्थ्य, सहकारिता, सेवायोजन आदि विभागों द्वारा लगाये गये स्टॉल्स का जनमानस ने भरपूर लाभ उठाया।

ज्ञातव्य है कि उत्तराखण्ड सहकारिता विभाग द्वारा यह मेला 07 से 15 अक्टूबर 2025 तक श्रीनगर में आयोजित किया जा रहा है।
इस अवसर पर परियोजना निदेशक डीआरडीए विवेक कुमार उपाध्याय, जिला विकास अधिकारी मनविंदर कौर, गढ़वाल मंडल के निवर्तमान अध्यक्ष संपत सिंह रावत, पूर्व अध्यक्ष डीसीबी नरेंद्र सिंह रावत, यूसीएफ अध्यक्ष मातबर सिंह रावत, जिला सहायक निबंधक पान सिंह राणा, इफको निदेशक उमेश त्रिपाठी, महावीर प्रसाद कुकरेती सहित बड़ी संख्या में जनमानस उपस्थित रहा।
