परमार्थ निकेतन से हरतालिका तीज और गुरु रामदास जी महाराज के ज्योति ज्योत दिवस पर शुभकामनाएँ
ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में पावन पर्व हरतालिका तीज एवं सिख पंथ के चतुर्थ गुरु, श्री गुरु रामदास जी महाराज के ज्योति ज्योत दिवस के अवसर पर विशेष प्रार्थना, संकीर्तन और गंगा आरती का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने सभी को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि –
“हरतालिका तीज केवल एक पर्व या परंपरा नहीं है, बल्कि यह नारी शक्ति की त्यागमयी शक्ति, अटूट संकल्प और समर्पण का अद्वितीय प्रतीक है। नारी शक्ति समाज और संस्कृति की आधारशिला है।”
उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में गार्गी और मैत्रेयी जैसी विदुषी नारियों ने ज्ञान, तपस्या और अध्यात्म से यह सिद्ध किया कि नारी केवल गृहिणी ही नहीं, बल्कि संस्कृति की वाहक और ज्ञान की धारा भी है। आधुनिक समाज में शिक्षा, सम्मान और नेतृत्व के क्षेत्र में नारी को समान अवसर देना ही सच्चे अर्थों में राष्ट्र और मानवता का सशक्तिकरण है।
स्वामी जी ने आगे कहा –
“हरतालिका तीज हमें यह प्रेरणा देती है कि हम प्रकृति में आस्था रखें, अपने जीवन में संयम और साधना का समावेश करें तथा पर्यावरण संरक्षण और पारिवारिक सौहार्द को प्राथमिकता दें।”
इसी अवसर पर परमार्थ निकेतन परिवार ने गुरु रामदास जी महाराज को गंगा आरती के माध्यम से विशेष श्रद्धांजलि अर्पित की। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि गुरु रामदास जी का जीवन त्याग, सेवा और करुणा का प्रतीक है। उन्होंने समाज को सच्चाई, समानता और भाईचारे का मार्ग दिखाया।
स्वामी जी ने संदेश दिया कि –
“गुरु रामदास जी का दर्शन है कि सच्ची भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि सेवा और समर्पण में ही उसका वास्तविक स्वरूप प्रकट होता है। उनकी अमर वाणी आज भी मानव समाज को सत्य, न्याय और शांति की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान करती है।”
समापन में स्वामी जी ने कहा कि पर्व और महापुरुषों का जीवन हमें यह संदेश देता है कि त्याग, सेवा और साधना के मार्ग पर चलकर ही जीवन में प्रेम, शांति और सद्भावना का विस्तार किया जा सकता है।
