घी संक्रांति पर्व पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने दी शुभकामनाएँ
ऋषिकेश। देवभूमि उत्तराखण्ड में आज लोकपर्व घी संक्रांति (घ्यू त्यार/ओल्गिया) बड़े हर्षोल्लास से मनाया जा रहा है। इस अवसर पर परमात्म निकेतन आश्रम के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह पर्व हमारी लोकसंस्कृति, परंपरा और पर्वतीय जीवनशैली का प्रतीक है।

स्वामी चिदानन्द ने कहा कि घी संक्रांति का गहरा संबंध हमारी भूमि, अन्न और पशुधन से है। यह पर्व किसानों और पशुपालकों की मेहनत का सम्मान है। आज के दिन ताजे अन्न, घी, दूध और स्थानीय खाद्य पदार्थों का आनंद लिया जाता है, जो न केवल स्वादिष्ट बल्कि स्वास्थ्यवर्धक भी होते हैं।
उन्होंने कहा कि यह पर्व सामाजिक और पारिवारिक बंधनों को मजबूत करने वाला है। रिश्तों में आत्मीयता, समाज में एकता और जीवन में संतुलन का संदेश घी संक्रांति देती है। पर्वतीय जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी यह पर्व खुशी, उल्लास और एकता का प्रतीक है।
स्वामी चिदानन्द ने युवाओं से आह्वान किया कि वे इस पर्व से प्रेरणा लेकर अपनी लोकसंस्कृति और परंपराओं पर गर्व करें और उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाएँ। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की संस्कृति, लोकगीत और पर्व हमें आत्मनिर्भरता, परिश्रम, सहयोग और कृतज्ञता का संदेश देते हैं।
अंत में स्वामी चिदानन्द ने प्रदेशवासियों के लिए मंगलकामनाएँ व्यक्त करते हुए कहा कि—
“देवभूमि उत्तराखण्ड का यह लोकपर्व घी संक्रांति सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और नई ऊर्जा लेकर आए।”
