देवी अहिल्याबाई होल्कर की पुण्यतिथि पर परमार्थ निकेतन में श्रद्धांजलि
ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में आज मालवा की पुण्यभूमि की गौरवशाली शासिका, सनातन चेतना की प्रतीक और नारी शक्ति की अद्वितीय प्रतिमूर्ति देवी अहिल्याबाई होल्कर की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने विदेश प्रवास के दौरान श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उन्हें धर्म, न्याय, सेवा और राष्ट्रभक्ति का जीवंत आदर्श बताया।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि 18वीं शताब्दी में अहिल्याबाई होल्कर जी ने न केवल मालवा का कुशल शासन किया, बल्कि भारत के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण में अमूल्य योगदान दिया। उनका शासन न्याय, करुणा और पारदर्शिता का प्रतीक था।
उन्होंने काशी, उज्जैन, सोमनाथ, द्वारका, हरिद्वार, रामेश्वरम्, गंगोत्री, बद्रीनाथ सहित अनेक तीर्थस्थलों पर मंदिरों, घाटों और धर्मशालाओं का निर्माण कराया। काशी विश्वनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण उनकी श्रद्धा और संकल्प का प्रतीक है।
स्वामी जी ने कहा कि अहिल्याबाई का जीवन यह संदेश देता है कि सच्चा नेतृत्व सत्ता पाने का माध्यम नहीं, बल्कि जनकल्याण का साधन है। उनकी पुण्यतिथि पर समाज को धर्म, न्याय और सेवा के मार्ग पर चलने का संकल्प लेना चाहिए।
