संस्कृत सप्ताह के उपलक्ष्य में भव्य सामूहिक यज्ञ का आयोजन, वैदिक परंपरा व संस्कृत गौरव का भाव जागृत
देहरादून। संस्कृत भाषा और भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से संस्कृतभारती देहरादून एवं श्रीगंगाउद्वारसेवासमिति, चन्द्रबनी के संयुक्त तत्वावधान में संस्कृत सप्ताह के पावन अवसर पर भव्य सामूहिक यज्ञ का आयोजन महन्त श्री हेमराज ठाकुर जी के सान्निध्य में संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम श्री बाबा बालकनाथ मंदिर, गौतमकुण्ड, चन्द्रबनी में आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में वैदिक मंत्रोच्चार, आहुतियाँ, संस्कृत भाषा में सामूहिक प्रार्थना, सांस्कृतिक प्रस्तुति, तथा संस्कृत साहित्य वितरण जैसे विविध आयोजन हुए, जिनके माध्यम से समाज में संस्कृत साधना और राष्ट्रीय चेतना के भाव को जागृत किया गया।
संस्कृतभारती देहरादून के विभाग संयोजक श्री नागेंद्र दत्त व्यास ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि संस्कृत सप्ताह का उद्देश्य संस्कृत भाषा, भारतीय संस्कृति एवं सनातन परंपराओं के गौरव को जन-जन तक पहुँचाना है।
उत्तराखंड विद्वत् सभा के महासचिव श्री दिनेश प्रसाद भट्ट ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने उद्बोधन में संस्कृत को लोकभाषा बनाने के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि विद्वत्सभा तन, मन और धन से संस्कृत सेवा को समर्पित है।
विशिष्ट अतिथि श्री मुकेश पंत (संस्थापक अध्यक्ष, पंतपीठ) ने संस्कृत को भारतीय संस्कृति की आत्मा बताते हुए कार्यक्रम में सहभागी कार्यकर्ताओं का उत्साहवर्धन किया।
जिलाध्यक्ष डॉ. राम भूषण बिजल्वाण ने संस्कृत सप्ताह के विविध आयोजनों की विस्तृत जानकारी देते हुए सभी को कार्यक्रम से जोड़ने की प्रेरणा दी।
गीता शिक्षण प्रमुख श्री योगेश कुकरेती ने कहा कि “सामूहिक यज्ञ के माध्यम से संस्कृत साधना और राष्ट्रीय चेतना का भाव समाज में प्रबल हुआ है।”
डॉ. प्रदीप सेमवाल ने सभी आगंतुकों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए संस्कृत निष्ठ जीवन शैली को अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के संयोजक आचार्य धीरज मैठाणी ने बताया कि यह आयोजन संस्कृत सप्ताह की श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो समाज में संस्कृत के प्रति आस्था एवं गौरव का भाव निर्मित कर रहा है। उन्होंने सभी नागरिकों, परिवारों, विद्यार्थियों एवं संस्कृतप्रेमियों से इस पवित्र अनुष्ठान में सहभागी होने का आह्वान किया।

इस अवसर पर संस्कृतभारती देहरादून के प्रमुख कार्यकर्ता – रायवाला खंड संयोजक नीतिश मैठाणी, खंड सह-संयोजिका डॉ. बीना पुरोहित, दून विश्वविद्यालय छात्र संयोजिका कनिका, तथा सहयोगी माधुरी नेगी, अनीता बुटोला, आनन्दी देवी, सोनाली, वाणी, आद्विक मैठाणी आदि उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त स्थानीय जनप्रतिनिधि, संस्कृत शिक्षकगण, विद्यार्थी, विद्वान एवं संस्कृतप्रेमी नागरिकों की सक्रिय सहभागिता ने इस आयोजन को गरिमामयी बना दिया।
