देहरादून। स्वामी रामतीर्थ मिशन, देहरादून में रविवार को एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक समारोह के अंतर्गत डॉ. स्वामी शिवचंद्र दास जी को मिशन के परमाध्यक्ष के रूप में विधिपूर्वक पट्टाभिषेक प्रदान किया गया। यह समारोह केवल दायित्व हस्तांतरण नहीं, बल्कि गुरु परंपरा, सेवा और समर्पण की दिव्य परंपरा का महोत्सव था।

वैदिक मंत्रोच्चारण एवं पारंपरिक अनुष्ठानों के बीच हुए इस पट्टाभिषेक समारोह में देशभर से धर्म, संस्कृति और समाज से जुड़े महान संतों, महापुरुषों और विद्वानों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले, परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती, पतंजलि योगपीठ के आचार्य बालकृष्ण, श्री बाबा मस्तनाथ मठ अस्थल बोहर, रोहतक के परमाध्यक्ष, श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन सहित षड्दर्शन साधु समाज के अनेक संत एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने इस अवसर पर कहा—
“यह केवल पट्टाभिषेक नहीं, अपितु पात्रताभिषेक और पवित्रताभिषेक है। यह गुरु परंपरा की पादूका का दिव्य अभिषेक है। यह क्षण भारत की सनातन संस्कृति के जीवंत बने रहने का प्रतीक है।”
आचार्य बालकृष्ण जी ने कहा—
“ज्ञान, साधना और सेवा जब एक साथ चलते हैं तो महान संस्थाएं जन्म लेती हैं। स्वामी शिवचंद्र दास जी के नेतृत्व में यह मिशन संयम व साधना का किला बनेगा।”
श्री दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा—
“स्वामी रामतीर्थ जी का संदेश युवाओं को राष्ट्रनिर्माण और आत्मनिर्भरता की ओर प्रेरित करता है। यह पट्टाभिषेक उस परंपरा को गति देने का कार्य करेगा।”
डॉ. स्वामी शिवचंद्र दास जी ने अपने संबोधन में कहा—
“मैं स्वयं को सौभाग्यशाली मानता हूँ कि मुझे इस मिशन की सेवा एवं स्वामी रामतीर्थ जी के आदर्शों को आगे बढ़ाने का अवसर मिला। मेरा संपूर्ण जीवन राष्ट्र, धर्म और समाज के कल्याण हेतु समर्पित रहेगा।”
यह समारोह सनातन धर्म की गुरु-शिष्य परंपरा की पुनर्पुष्टि और सांस्कृतिक चेतना की प्रेरक अभिव्यक्ति रहा। यह न केवल एक संगठनात्मक उत्तरदायित्व है, बल्कि आत्मिक नेतृत्व और तप-संस्कारों की महान परंपरा का जीवंत उत्सव है।
