संसद का मानसून सत्र 2025: पहला दिन – बहस, हंगामा और कड़ी राजनीतिक टक्कर
2025 के मानसून सत्र का पहला दिन संसद भवन में जबरदस्त राजनीतिक गर्मी के साथ शुरू हुआ। सुरक्षा मुद्दों, “ऑपरेशन सिंदूर”, और विपक्ष की ओर से केंद्र सरकार पर हमलों ने लोकसभा और राज्यसभा दोनों को प्रभावित किया। कई महत्वपूर्ण विधेयकों की रूपरेखा भी पेश की गई, लेकिन हंगामे की वजह से चर्चा नहीं हो सकी।

प्रधानमंत्री का वक्तव्य: “यह विजयोत्सव का समय है”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्र शुरू होने से पहले मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि यह सत्र देश के लिए गौरव का क्षण है क्योंकि भारत का तिरंगा हाल ही में अंतरिक्ष में अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) पर फहराया गया है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को देश की सुरक्षा नीति की सफलता बताया और कहा कि “बम-बंदूक के सामने अब संविधान की जीत हो रही है।” उन्होंने कहा कि भारत आज आतंकवाद को उसी की भाषा में जवाब दे रहा है।
प्रधानमंत्री ने इस सत्र को ‘विकास’, ‘विरोध’ और ‘विचार’ का संगम कहा।
लोकसभा में हंगामा, दो बार स्थगन
सत्र की शुरुआत होते ही विपक्षी दलों ने “ऑपरेशन सिंदूर”, “पहलगाम आतंकी हमला” और “कश्मीर घाटी की स्थिति” पर तत्काल चर्चा की मांग की। विपक्ष ने “रूल 267” के तहत कार्य स्थगित कर विशेष चर्चा की अनुमति मांगी, लेकिन स्पीकर द्वारा अनुमति न मिलने पर सदन में नारेबाज़ी शुरू हो गई। 20 मिनट के अंदर ही लोकसभा को पहले स्थगित किया गया और बाद में दोबारा हंगामे के कारण फिर से स्थगन करना पड़ा।
राज्यसभा में गर्मागर्म बहस
राज्यसभा में विपक्ष और सत्ता पक्ष आमने-सामने दिखाई दिए। कांग्रेस के मलिकार्जुन खड़गे और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के बीच तीखी बहस हुई। खड़गे ने कहा कि सरकार संवेदनशील मुद्दों से भाग रही है और वास्तविक चर्चा नहीं करना चाहती, जबकि नड्डा ने जवाब में कहा कि सरकार ने आतंकवाद पर निर्णायक कार्रवाई की है और देश की जनता विपक्ष के दोहरे चरित्र को समझ चुकी है।
श्रद्धांजलि और शपथ ग्रहण
सत्र के पहले दिन दोनों सदनों में पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए जवानों, एयर इंडिया की विमान दुर्घटना, और अन्य दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि दी गई। इसके अतिरिक्त, राज्यसभा में पांच नए सदस्यों ने शपथ ली जिनमें तीन नामित सदस्य भी शामिल थे।
विपक्ष की रणनीति: सरकार को घेरे रखने का प्रयास
कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी, आम आदमी पार्टी, और वामपंथी दलों ने संयुक्त रूप से मानसून सत्र को ‘सरकार की विफलताओं को उजागर करने का मंच’ बताया। कांग्रेस ने कहा कि “ऑपरेशन सिंदूर” को लेकर सरकार के बयानों और जमीनी सच्चाई में अंतर है।
राहुल गांधी ने मीडिया से बातचीत में कहा, “सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस से जवाब नहीं चलेंगे, देश संसद में जवाब चाहता है।”
सरकार का रुख
सरकार की ओर से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने स्थिति स्पष्ट की कि “ऑपरेशन सिंदूर” पूरी तरह सफल रहा है और कश्मीर घाटी में हालात नियंत्रण में हैं। उन्होंने विपक्ष पर देश की सुरक्षा के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया।
राजनाथ सिंह ने कहा कि “आज जो आतंकवाद के खिलाफ सफलता मिली है, वह सेना, खुफिया एजेंसियों और सरकार के समन्वित प्रयासों का परिणाम है।”
विधायी एजेंडा: क्या है सरकार की योजना?
मानसून सत्र में सरकार द्वारा 8 नए विधेयक पेश किए जाने की योजना है, जिनमें प्रमुख हैं:
- इनकम टैक्स संशोधन विधेयक
- राष्ट्रीय डोपिंग रोधी विधेयक
- बिल्स ऑफ लाडिंग बिल, 2025
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा प्रोटेक्शन बिल
- भारतीय नागरिकता संशोधन विधेयक
- रक्षा खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता से संबंधित विधेयक
इनमें से बिल्स ऑफ लाडिंग बिल, 2025 पहले ही राज्यसभा में पारित हो चुका है। यह 1856 के पुराने कानून की जगह लेगा और आधुनिक व्यापारिक दस्तावेज़ों की डिजिटल मान्यता प्रदान करेगा।
सत्र की प्राथमिक चुनौतियाँ
क्षेत्र विवरण सुरक्षा मुद्दे ऑपरेशन सिंदूर, कश्मीर घाटी की स्थिति, पाकिस्तान को जवाब राजनीतिक गतिरोध विपक्ष की चर्चा की मांग और सरकार का टालना विधायी कार्य 8 नए विधेयकों पर सहमति और बहस की आवश्यकता जनता की अपेक्षा बेरोज़गारी, महंगाई, और महिला सुरक्षा जैसे विषयों पर चर्चा
राजनीतिक समीकरण
इस सत्र के पहले ही दिन जो रुख सामने आया है, उससे साफ है कि विपक्ष एकजुट होकर सरकार को लगातार घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है। दूसरी ओर, सरकार ने रक्षा और सुरक्षा मुद्दों को प्राथमिकता देते हुए इस सत्र को ‘गौरव का अवसर’ बताया है।
निष्कर्ष
मानसून सत्र 2025 का पहला दिन राजनीतिक गतिरोध और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों से घिरा रहा। जहाँ एक ओर सरकार अपनी उपलब्धियों को लेकर उत्साहित नजर आई, वहीं विपक्ष ने केंद्र की नीति और रणनीति पर कठोर सवाल उठाए। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह सत्र केवल शोरगुल तक सीमित रहता है या सार्थक बहस और कानून निर्माण की दिशा में आगे बढ़ता है।
