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आज ही के दिन हुई सृष्टि की रचना

ब्रह्मपुराण के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी इसीलिए आज के दिन को नव संवत्सर के रूप में मनाया जाता है।

भारतीय कैलेंडर की शुरुआत राजा विक्रमादित्य के समय से हुई थी, इसलिए इसे विक्रमी सम्वत के नाम से जाना जाता है। हालांकि भारतीय ज्योतिष पद्धति बहुत प्राचीन है, इसमें ग्रह नक्षत्रों का सटीक वर्णन मिलता है।

मेष आदि बारह राशियां सौर वर्ष के 12 माह हैं, सौर वर्ष तीन सौ पैंसठ दिन का होता है। सौर वर्ष में सूर्य के मेष राशि में प्रवेश से वर्ष नववर्ष की शुरुआत माना जाता है। जब मेष राशि का पृथ्वी के ऊपर भ्रमण चक्र चलता है तो तब चांद्रमास चैत्र मास भी शुरु हो जाता है। चांद्रमास में सूर्य किसी दूसरी राशि में हो सकता है।

आज के दिन को नव संवत्सर के रूप में मनाने के अनेक कारण माने जाते हैं, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन से ब्रह्माजी के द्वारा सृष्टि की रचना को आरम्भ किया गया था। इसके अलावा इसी दिन से सतयुग का आरम्भ, भगवान का मत्स्य अवतार, अयोध्या में भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक आज ही के दिन हुआ था।

नव संवत्सर के दिन प्रात: काल घर को गोबर से लिपाई करके गोमूत्र, गंगाजल से पवित्र करके घर में दीपक जलाकर कलश स्थापना करके जौ बोए जाते हैं, लोग अपने घर में ब्राह्मणों से दुर्गा सप्तशती का पाठ करवाते हैं।

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