प्रदेश में समान विचारधारा के क्षेत्रीय दलों के उभरने से यूकेडी को हो रही है भारी क्षति -: डॉ. शक्तिशैल कपरवाण
*राज्य में चल रहे मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम के बारे में डॉ. कपरवाण ने केंद्रीय अध्यक्ष पूरनसिंह कठैत को लिखा पत्र*
देहरादून। उत्तराखंड में उत्तराखंड क्रांति दल के समान विचारधारा के क्षेत्रीय दलों के उभरने से उत्तराखंड क्रांति दल को भविष्य में भारी नुकसान हो सकता है। दल के संरक्षक एवं मार्गदर्शन बोर्ड के अध्यक्ष डॉक्टर शक्तिशैल कपरवाण ने चिंता व्यक्त करते हुए राज्य में चल रहे राजनीतिक घटनाक्रम के बारे में उक्रांद के केंद्रीय अध्यक्ष पूरणसिंह कठैत को पत्र लिखकर अपनी चिंता जाहिर करते हुए, पत्र लिखा कि समस्त उत्तराखंड में वर्तमान में राजनीतिक अस्थिरता छाई हुई है। भ्रष्टाचार और अपराध का वातावरण बना हुआ है। सरकार का प्रशासन पर अंकुश नहीं है। जिसके कुपरिणाम से उत्तराखंड और विशेष कर पहाड़ की जनता त्रस्त है।

उत्तराखंड क्रांति दल के वरिष्ठ नेताओं पर आरोप लग रहे हैं कि हमारी कमी से अनेक हमारी ही विचारधारा के क्षेत्रीय दल उभर रहे हैं जो आगे जाकर यूकेडी को और अधिक कमजोर करेंगे। उत्तराखंड क्रांति दल के सामने बहुत बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं। यूकेडी से जुड़ने वाले युवाओं की बड़ी मांग है कि यूकेडी को अपनी विचारधारा और दिशा को प्रभावी ढंग से जनता के बीच प्रस्तुत करने का उचित समय है, ताकि जनता, युवा, महिला, भूतपूर्व सैनिक , विभिन्न व्यावसायिक , कर्मचारी, शिक्षक आदि संगठन बार एसोसिएशन आदि विभिन्न प्रकार के संगठनों से सीधा संवाद किया जाय और हम एक विशाल कैडर और उसके ऊपर लीडर का विकास कर सके। हमको पंचायत , स्थानीय निकाय (वार्ड), ,पंचायत कालेज स्तर पर भी लीडर बनाने हैं। दल के सामने अनेक जटिल विषय है, जिनको सुलझाना है। ग्रास रूट स्तर पर तीनों इकाइयों की युवा शक्ति को प्रशिक्षण देने की अत्यधिक आवश्यकता है। ताकि जमीनी स्तर का समाज उत्तराखंड क्रांति दल के योगदान और विचारधारा को आत्मसात कर सके।
इसलिए मेरा आग्रह है कि शीघ्र मार्गदर्शन बोर्ड की एक बैठक बुलाई जाए और उत्तराखंड क्रांति दल का यह बोर्ड उत्तराखंड नव निर्माण के संदर्भ में राज्य स्तरीय समिनार (संगोष्ठी )का आयोजन करे। यह कार्य इसलिए भी नितांत आवश्यक होगया है कि यूकेडी से जुड़ने वाले युवाओं को क्षेत्रीय राजनीतिक विचारधारा का प्रशिक्षण दिया जा सके और यूकेडी स्वस्थ युवा शक्ति व युवा नेतृत्व का निर्माण हो सके।
