उत्तराखंडदेहरादून

लेखक गाँव महोत्सव में साहित्य, संस्कृति और कला का वैश्विक संगम, दिग्गज हस्तियों ने बढ़ाई शोभा

देहरादून। साहित्य, संस्कृति और कला के वैश्विक संगम के रूप में लेखक गाँव अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव 2026 का रविवार, 25 अक्टूबर को भव्य शुभारंभ हुआ। 29 अक्टूबर तक चलने वाले इस पांच दिवसीय महोत्सव में 60 से अधिक देशों के साहित्यकारों, विचारकों, कलाकारों और विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित विभूतियों की सहभागिता हो रही है। महोत्सव का उद्देश्य साहित्य और कला के माध्यम से सांस्कृतिक चेतना, रचनात्मकता, मानवीय संवेदनाओं और वैश्विक संवाद को प्रोत्साहित करना है।

महोत्सव में उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति पृथ्वीराज सिंह रूपन ने की। इस अवसर पर उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज और प्रदीप बत्रा, भोपाल स्थित रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष चौबे तथा ब्रिटेन के प्रसिद्ध कथाकार तेजेंद्र शर्मा, एमबीई सहित अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। परमार्थ निकेतन के पीठाधीश्वर स्वामी चिदानंद सरस्वती का भी महोत्सव को सान्निध्य प्राप्त हुआ। आयोजन डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के मार्गदर्शन और प्रेरणा से किया जा रहा है।

राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में लेखनी और साहित्यकारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। साहित्य एवं कला ने जनमानस में नवचेतना जागृत करने, राष्ट्रीय चेतना को स्वर देने और समाज को स्वतंत्रता के संकल्प से जोड़ने में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि लेखक गाँव कल्पना से लोकमंगल तक की सृजन यात्रा है। प्रकृति की काव्यमयी चेतना, हिमालय की दिव्यता और मां गंगा की पावन धारा के बीच स्थित यह आयोजन सृजन का विलक्षण संगम है। उन्होंने कहा कि लेखक गाँव डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ की कल्पनाशीलता, साहित्यिक साधना और लोकमंगलकारी दृष्टि का साकार स्वरूप है। भारतीय ऋषि परंपरा में शब्द को ब्रह्म और साहित्य को लोककल्याण का माध्यम माना गया है। लेखक गाँव इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कल्पना को संकल्प और संकल्प को सृजन में बदलने की प्रेरणा देता है।

पांच दिवसीय महोत्सव में विभिन्न भाषाओं, साहित्यिक विधाओं, कला और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। आयोजन के माध्यम से देश-विदेश के रचनाकारों और संस्कृति प्रेमियों को संवाद तथा विचारों के आदान-प्रदान का अवसर मिलेगा। साथ ही विभिन्न देशों की सांस्कृतिक विविधताओं को समझने, पारस्परिक सौहार्द बढ़ाने और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।

महोत्सव का संचालन डॉ. सुशील उपाध्याय ने किया। आयोजन के संयोजक अजय बिष्ट, बालकृष्ण चमोली और पूजा पोखरियाल हैं। पंडाल प्रभारी के रूप में डॉ. अंजना विलियम्स, डॉ. योगिता राणा और डॉ. शिखा शर्मा सहित अन्य सहयोगी आयोजन की व्यवस्थाओं में योगदान दे रहे हैं।

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