दिल्ली

अंकिता को न्याय दिलाने की मांग पर इंडिया गेट पर प्रदर्शन, मोहित डिमरी समेत 30 से अधिक हिरासत में

नई दिल्ली। अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग और दुष्यंत गौतम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति रद्द करने की मांग को लेकर रविवार को दिल्ली के इंडिया गेट पर उत्तराखंड के लोगों ने प्रदर्शन किया। राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपने के लिए राष्ट्रपति भवन की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस ने रोक दिया। इस दौरान मोहित डिमरी समेत 30 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, पुलिस उन्हें जाफरपुर कलां थाने ले गई।

प्रदर्शन का आह्वान मोहित डिमरी ने किया था। उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने इंडिया गेट पर एकत्र होकर अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने, मामले में कथित वीआईपी की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने और दुष्यंत गौतम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति रद्द करने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों के हाथों में मांगों से संबंधित पोस्टर, बैनर और तख्तियां थीं।

इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन की ओर मार्च शुरू होते ही दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बल प्रयोग करने का आरोप लगाते हुए विरोध जताया और मौके पर बैठकर नारेबाजी की। इसके बाद पुलिस ने मोहित डिमरी, इंद्रेश मैखुरी, ब्रिगेडियर सर्वेश डंगवाल, त्रिलोचन भट्ट, बृजमोहन उप्रेती, शशि मोहन कोटनाला, दीपक भाकुनी, आरके भट्ट, हुकुम कंडारी, दिव्या दीपा चतुर्वेदी, नंदन सिंह रावत, रवि चतुर्वेदी, जगदीश चन्द्र, लक्ष्मी नेगी, दिनेश रिखाड़ी, प्रभाकर पोखरियाल, लक्ष्मण सिंह रावत और हरिपाल रावत समेत कई अन्य लोगों को हिरासत में ले लिया।

‘दुष्यंत गौतम को इस्तीफा देना ही होगा, आंदोलन जारी रहेगा’

आंदोलनकारी मोहित डिमरी ने कहा कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग करने वालों को हिरासत में लिया जा रहा है, जबकि मामले में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दुष्यंत गौतम को कानूनी कार्रवाई से बचाने के उद्देश्य से राज्यपाल पद पर नियुक्त किया गया है। उन्होंने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और किसी भी व्यक्ति को संवैधानिक पद की आड़ में जांच से बचने का अवसर न मिले।

इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि दुष्यंत गौतम को राज्यपाल पद से इस्तीफा देकर जांच का सामना करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। उनके मुताबिक, यह लड़ाई अब केवल अंकिता को न्याय दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तराखंड की अस्मिता, सम्मान और न्याय से भी जुड़ गई है।

ब्रिगेडियर सर्वेश डंगवाल ने कहा कि उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष को और व्यापक किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति से मामले में हस्तक्षेप करने, कथित वीआईपी की भूमिका की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराने और दुष्यंत गौतम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति रद्द करने की मांग की।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अंकिता भंडारी को न्याय मिलने और मामले से जुड़े सवालों के निष्पक्ष जांच के जरिए जवाब सामने आने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

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