स्व. आसाराम व्यास की स्मृति में श्रीमद्भागवत कथा का समापन, भक्ति और संस्कारों का दिया संदेश
मुनिकीरेती। स्वर्गीय आसाराम व्यास जी की पुण्य स्मृति में आयोजित श्रीमद्भागवत पुराण कथा का विधिवत समापन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच हुआ। कथा के विश्राम दिवस पर व्यासपीठ से आचार्य शिवराम भट्ट ने श्रीमद्भागवत के विभिन्न प्रसंगों की व्याख्या करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, कर्म, परोपकार और पारिवारिक संस्कारों का महत्व बताया।

आचार्य शिवराम भट्ट ने स्व. आसाराम व्यास को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि सत्कर्म, परोपकार और ईश्वर के प्रति समर्पण से जीवन को सार्थक बनाने वाले व्यक्ति शरीर से भले ही संसार से विदा हो जाएं, लेकिन उनके विचार और संस्कार परिवार व समाज में सदैव जीवित रहते हैं। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने और मनुष्य को आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने का माध्यम है।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत पुराण गृहस्थ जीवन में धर्म, मर्यादा और सदाचार का मार्ग दिखाता है। परिवार में प्रेम, आपसी समन्वय, बड़ों का सम्मान और छोटों के प्रति स्नेह ही भागवत के संदेश को जीवन में उतारने का वास्तविक स्वरूप है। सुदामा-कृष्ण मिलन का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने सच्ची मित्रता, निस्वार्थ प्रेम और संकट के समय एक-दूसरे का साथ देने का संदेश दिया। वहीं, शुकदेव जी और राजा परीक्षित के संवाद के माध्यम से जीवन की नश्वरता तथा भगवद् स्मरण के महत्व को समझाया।
आचार्य ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि सात दिनों तक कथा श्रवण से प्राप्त ज्ञान को केवल कथा पंडाल तक सीमित न रखें, बल्कि उसे अपने व्यवहार और जीवन में अपनाएं। परिवार और समाज में प्रेम, सद्भाव तथा नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देना ही स्व. आसाराम व्यास जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ के समापन अवसर पर व्यास परिवार के साथ कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, मुनिकीरेती नगरपालिका अध्यक्ष नीलम बिजल्वाण, पूर्व अध्यक्ष रोशन रतूड़ी, डॉ. सुनील दत्त थपलियाल, चन्द्रवीर पोखरियाल, विशाल मणि पैन्यूली, घनश्याम नौटियाल, नरेंद्र मैठाणी, रमा बल्लभ भट्ट, धनीराम बिंजोला सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने धर्म, भक्ति और सदाचार के संदेश को अपने जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया।

